भारत और चीन के रिश्ते इस समय तनावपूर्ण चल रहे है. लगभग एक महीने से सिक्किम के डोकलाम में चीनी और भारतीय सेना आमने सामने है. चीन भारत को लगातार युद्ध की धमकी भी दे रहा है. चीनी मीडिया के साथ चीनी सैनिक भी भारत को युद्ध करने की धमकी दे रहे है. भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन के दौरे पर जाने के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में ज्यादा बदलाव नही आया है. खबर तो यह भी है कि अजीत डोभाल के चीन के दौरे से ठीक पहले चीनी सेना उत्तराखंड में लगभग 1किमी. तक अंदर चली आई थी लेकिन वहां मौजूद भारतीय सेना ने उन्हें वापस भेजा. इसी बीच एक और देश ने भारत को धमकी दे डाली है.

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दरअसल चीन के बाद अब ईरान ने भारत को धमकी दी है.इरान और भारतीय कंपनी ने मिलकर एक गैस फिल्ड की खोज की है इसे खोजने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसी मलें में कुछ दिन पहले ही भारत ने ईरान को चेतावनी दी थी साथ ही उससे क्रूड आयल कम खरीदने की धमकी दी थी.बाद में भारत ने बिगड़ते माहौल को संभालते हुए 11 बिलियन डॉलर इन्वेस्टमेंट का भी प्रस्ताव दिया है लेकिन इस सब के बावजूद इरान ने धमकी देते हुए कहा कि भारत दादागिरी न दिखाए. जिस गैस फील्ड को ईरान और भारत सरकार की कम्पनी ने मिलकर खोजा है उसमें से गैस निकालने का काम वो किसी और देश को भी दे सकता है.इसी के साथ ईरान ने रुसी कम्पनी के साथ तेल निकालने का समझौता भी कर लिया है.

 

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ये पूरा मामला ईरान के फरजाद-बी गैस फील्ड का है इस गैस फील्ड की खोज भारतीय सरकारी कम्पनियों ने की थी जिसे लेकर अब इरान कह रहा है कि वो अब भारत  के साथ मिलकर काम करने के लिए बाध्य नही है. वो किसी भी देश के साथ तेल निकालने को समझौता कर सकता है. इसके पीछे इरान तर्क दे रहा है कि उनका और भारतीय कम्पनियों का समझौता गैस फील्ड की खोज और रिसर्च के लिए था जो अब पूरा हो चूका है.इस समझौते में ऐसा कही नही लिखा है कि खोज के बाद भारत कम्पनियां ही गैस फील्ड के विकास के लिए और तेल निकालने का काम करेगी.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इरान राष्ट्रपति हसन रौहानी के बीच पिछले साल इस गैस फील्ड को लेकर बातचीत भी हुई थी. लेकिन दोनों ही देश इस डील को लेकर आगे नही बढ़ पाए. ऐसे में भारत ने इरान के इस गैस फील्ड के विकास के लिए 11 बिलियन डॉलर निवेश करने का प्रस्ताव रख था इसके बावजूद भी उसने रुसी कम्पनी के साथ तेल निकालने का शुरुवाती समझौता भी कर लिया है.ईरान के मजलिस एनर्जी कमीशन के प्रवक्ता अस्दोल्लाह घरेखानी ने कहा कि जो पहले समझौता हुआ वो फरजाद बी गैस फील्ड के रिसर्च का समझौता था जो कि अब पूरा हो चूका है.

 

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इरान ने कहा कि समझौते में कही नही लिखा था कि गैस निकालने का कॉन्ट्रैक्ट भी भारत को ही दिया जाएगा. हम अपने फायदे के मुताबिक अपना दुसरा साथी खोज लेंगे. हालाँकि  भारत हमेशा से इरान के साथ खड़ा है  वो अंतर्राष्टीय प्रतिबंधों के बावजूद द्विपक्षीय संबंधो को इरान के साथ बढाता रहा है. इसके बावजूद ईरान का बदला रवैया भारत को  हैरान करने वाला है.ईरान के इस तरह की बातचीत से भारत को झटका लग सकता है.