देश में इस समय बीजेपी सरकार अपना परचम लहरा रही है, अधिकाँश भारतीय इलाकों में इस समय बीजेपी सरकार है और हाल ही में बिहार में भी बीजेपी ने कदम रख दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर शनिवार को लखनऊ पहुंचे जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया. उनका स्वागत करने के लिए बीजेपी के कई कार्यकर्ता हवाईअड्डे पर मौजूद थे. शाह 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारियों को देखने के लिए लखनऊ गए थे. लखनऊ पहुंचे ही अमित शाह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाक़ात की और इसके साथ ही अमित शाह ने यहाँ लोकसभा चुनाव में जीत कैसे हांसिल की जाए इसके लिए अपने कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र भी दिया.

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जहाँ एक ओर यूपी में समाजवादी पार्टी के दो विधान परिषद सदस्यों के इस्तीफे को लेकर खलबली मची हुई है वहीँ इसी बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को पार्टी के एक कार्यकर्ता के घर दोपहर का भोजन किया जो कि जाति से ‘यादव’ था. जी हाँ तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ आये अमित शाह ने दूसरे दिन गोमतीनगर के बड़ी जुगौली इलाके में सोनू यादव नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता के घर जाकर भोजन किया था. इस दौरान अमित शाह के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद थे और उन्होंने भी सोनू के घर भोजन किया था.

 

आपको बता दें कि अमित शाह द्वारा उठाए गए इस कदम से तो यही आस लगायी जा रही है कि जहाँ यादव बिरादरी को सपा का मुख्य वोट बैंक माना जाता है ऐसे में अमित शाह द्वारा एक व्यक्तिगत जाति के कार्यकर्ता के घर जाकर भोजन करने को तो यही कहा जा सकता है कि कहीं न कहीं ये सब यादव वोट बैंक को भाजपा की तरफ लुभाने की कोशिश है. आपको बता दें कि अभी हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव को भी लेकर खबर आई थी कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और उनके भाई सपा विधायक शिवपाल यादव ने भी बीजेपी का साथ देते हुए रामनाथ कोविंद का खुला समर्थन किया था.

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उत्तर प्रदेश पहुँचते ही अमित शाह वैसे तो पार्टी की तैयारियों पर ध्यान देने लगे थे लेकिन उनके वहां पहुँचते ही सियासी हलचलें तेज हो गई थी. आपको बता दें की समाजवादी पार्टी के तीन MLC मधुकर जेटली, बुक्कल नवाब और यशवंत सिंह ने इस्तीफ़ा दे दिया है. वहीँ बसपा के भी एक MLC जयवीर सिंह ने भी अपनी पार्टी छोड़ दी है.

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सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी के MLC ने इस्तीफ़ा इसलिए दिया है ताकि वो लोग बीजेपी में शामिल हो सकें. इसके पीछे कि बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा को अपने मंत्रीमंडल से कई चेहरों को विधान परिषद में भेजना है. सपा के मंत्रियों का इस्तीफ़ा अखिलेश के लिए एक हादसे की तरह है. विधानसभा चुनावों में हुई करारी हार के बाद एक बार फिर सपा को बड़ा झटका लगा है.

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इसी कड़ी में दो डिप्‍टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश चंद्र शर्मा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ स्वतंत्र देव सिंह और मोहसिन रजा भी शामिल हैं. मंत्रीमंडल का सदस्य होने के नाते इनका किसी न किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है, जोकि अभी ये नहीं हैं. इसी वजह से समाजवादी पार्टी के MLC के इस्तीफों को इस पूरे प्रकरण से जोड़ा जा रहा है.अगर ये MLC बीजेपी में चले जाते हैं तो इनकी सीटें खाली हो जाएंगी जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी आसानी से अपने चेहरों को MLC बना सकेगी. इस तरह से समाजवादी पार्टी के इन नेताओं के इस्तीफ़े MLC चुनावों में भाजपा के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है. उत्तर प्रदेश की सत्ता में आए बीजेपी को चार महीने बीत चुके हैं और इसीलिए दो महीनों के भीतर उसको अपने मंत्रियों को किसी भी सदन का सदस्य बनाना अनिवार्य है.