पिछले कुछ समय से बिहार की राजनीति गरमाई हुई है. कारण है अचानक से नीतीश कुमार का इस्तीफ़ा दे देना. इस्तीफ़ा भी मानो कम था कि इधर लालू का हाथ छोड़ते ही नीतीश कुमार ने बीजेपी से हाथ मिलाकर बची-कुची कसर भी पूरी कर दी. नीतीश कुमार के इस तरह अचानक से आये इस्तीफ़े को लालू यादव और उनका परिवार मानो हजम ही नही कर पा रहे हैं. तभी कोई तर्क तो कभी कोई आरोप लगाकर वो नीतीश कुमार के इस इस्तीफे तो बेबुनियाद बताने में जुटे हुए हैं. खैर अब तो लग रहा है यादव परिवार के इस नाटक का शायद ही कोई असर हो, क्योंकि नीतीश कुमार ने इस्तीफ़ा भी दे ही दिया और विश्वासमत भी साबित कर लिया. nitishkumar

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सीएम बनने के लिए किसके सामने रोये थे नीतीश कुमार 

नीतीश कुमार के गठबंधन तोड़ के यूँ ही चले जाने से बेहद खफ़ा समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह अब लगातार ही नीतीश कुमार से जुड़ी कोई ना कोई नयी बात लेकर मीडिया के सामने आ रहे हैं. ऐसे में सबसे ताज़ा खुलासा करते हुए हाल ही में मुलायम सिंह ने बताया कि  सीएम का चेहरा बनने के लिए नीतीश कुमार उनके सामने रोये थे.

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लालू कभी भी नीतीश कुमार पर भरोसा करने के पक्ष में थे ही नहीं

उन्होंने आगे ये भी कहा कि जिस वक़्त पार्टी में ये सब चल रहा था उस समय से ही लालू किसी भी कीमत पर नीतीश पर भरोसा करने को तैयार नहीं थे.  उन्होंने नीतीश के बारे में बताते हुए मुझे इस बात के लिए आगाह किया था कि नीतीश बिहार के मतदाताओं को धोखा दी चुके हैं.

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लालू यादव नहीं चाहते थे कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनें

मुलायम सिंह इस मुद्दे पर और परतें उतारते हुए आगे बताते हैं कि जब पार्टी में नीतीश कुमार को सीएम पद का चेहरा चुना जा रहा था तब भी लालू चाहते थे कि चुनाव के बाद विधायकों की संख्या के मुताबिक सीएम चुना जाये. यानी की मतलब साफ था कि लालू नीतीश के साथ सिर्फ गठबंधन चाहते थे.

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मुलायम के दबाव के आगे झुक गए थे लालू

इन सब बातों से एक बात जो आईने की तरह साफ़ होकर सामने आ रही है वो ये कि लालू यादव मुख्यमंत्री के चेहरे के बिना चुनाव में जाना चाहते थे. इसके पीछे लालू की रणनीति ये मानी जा रही है कि उनके दिमाग में कहीं ना कहीं ये मंशा ज़रूर रही होगी कि अगर उनकी पार्टी को ज्यादा सीट मिले तो वो बाद में नीतीश कुमार पर दबाव डाल सकें. हालांकि, मुलायम के दबाव में लालू ने नीतीश की मांग मान ली थी.

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मुलायम के घर में थी मीटिंग 

 8 जून 2015 को मुलायम सिंह के घर पर लालू यादव और नीतीश कुमार की एक बैठक रखी जाती है. इस मीटिंग में सीटों के बंटवारे को लेकर फैसला होने वाला था. ठीक उसी वक़्त जनता दल का हिस्सा रहे दलों को एकजुट करने की एक मुहिम भी साथ-ही-साथ चल रही थी, जिसके कारण मुलायम उस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे.
मुलायम ने इस मीटिंग में मुखिया के तौर पर न सिर्फ लालू यादव और नीतीश कुमार के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बनवाई, बल्कि नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी बेहद ही आसान कर दिया.

नीतीश और लालू की जंग में महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरे थे मुलायम 

बताया जाता है कि नीतीश और लालू की जंग में मुलायम का कूदना कई मायने में महत्वपूर्ण रहा है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि मुलायम सिंह न सिर्फ लालू यादव के रिश्तेदार हैं, बल्कि नीतीश कुमार से भी उनकी सियासी अदावत रह चुकी है. ऐसे में इस वक्त नीतीश के बीजेपी के साथ हो जाने से कहीं-ना-कहीं वह भी बेहद नाराज हैं.

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हो सकती है मुलायम सिंह और शरद यादव की मुलाकात  

बता दें कि ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मुलायम और शरद यादव की मुलाकात भी हो सकती है. अबतक मिली जानकारी के अनुसार, दोनो नेता अपनी-अपनी पार्टी से इस वक़्त खासे नाराज चल रहे हैं. साथ ही यहाँ ये बात भी गौर करने वाली है कि मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल एक सेक्युलर मोर्चा बनाने की ताक में हैं.

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याद दिला दें तो नीतीश द्वारा इस्तीफ़ा देकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद उनसे उखड़े लालू यादव और उनका परिवार लगातार ही नीतीश कुमार पर हमला कर रहा हैं.  ऐसे में दिलचस्प बात ये है किअब नीतीश कुमार मुलायम सिंह के निशाने पर भी आ गए हैं. लालू यादव शरद यादव और अब मुलायम के हमले की जद में आने के बावजूद नीतीश की सियासी सेहत पर फ़िलहाल तो कोई असर पड़ता नज़र नहीं आ रहा है, हाँ लेकिन उनकी छवि पर एक सवालिया निशान ज़रूर लग रहा है.