गुजरात में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर इस समय जो विवाद चल रहा है उसमें हर किसी की दिलचस्पी बढ़ गयी है. दरअसल गुजरात से 3 राज्यसभा सीटों के लिए चार उम्मीद्वार खड़े हो जाने से मुकाबला दिलचस्प हो रहा है. इसी के साथ टूटते कांग्रेस के विधायको से एक तरफ जहाँ परेशान कांग्रेस अपने विधायकों को एक रिसॉर्ट में छुपा कर रखा है. कांग्रेस अपने ही पार्टी के विधायकों के टूट जाने के डर से यह कदम उठाने पर मजबूर हुई है. लेकिन इस सबके बीच सवाल यह उठता है कि आखिर बीजेपी अहमद पटेल को हराने के लिए इतना परेशान क्यों है?

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोनिया गाँधी के राजनीतिक सलाहकार और करीबी माने जाने वाले नेता अहमद पटेल 4 बार से राज्यसभा के सदस्य रह चुके है. 4 बार तो उनकी राज्यसभा जाने की राह आसान रही थी लेकिन इस बार अहमद पटेल के लिए ये रास्ता इतना आसान नही होने वाला है. दरअसल गुजरात कांग्रेस के बड़े नेता माने जाने वाले शंकर सिंह वाघेला ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया और राज्यसभा चुनाव के बाद पार्टी भी छोड़ने का एलान कर दिया है. शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस के कई विधायक उनके संपर्क में है ऐसे में कांग्रेस के लिए बचे हुए 51 विधायको के वोट में से भी  कुछ वोट जाने का डर है.

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बीजेपी का दांव 

बीजेपी के मजबूती का सबूत इस बात से ही  मिल जाता है कि कांग्रेस अपने ही विधायकों के टूट जाने के डर से राज्य के बाहर ले जाने पर मजबूर हो गयी.इसके आलवा कांग्रेस के 6 विधायक अहमद पटेल के नामांकन के तुरंत बाद पार्टी से इस्तीफ़ा देकर बीजेपी में शामिल हो गये. बीजेपी ने इन्हीं में से एक विधायक बलवंत सिंह राजपूत को अपना तीसरा उम्मीद्वार बना दिया.अब कांग्रेस से आये बलवंत सिंह के संपर्क में कुछ कांग्रेसी विधायक थे जिसकी वजह से अहमद पटेल की दावेदारी खतरे में थी. इसके बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु ले जाकर सुरक्षित रखना चाहा लेकिन वहा भी मोदी सरकार ने पीछा नही छोड़ा.ED के छापे के बाद इस बात के साफ़ संकेत मिल चुके है कि ,बीजेपी पीछे हटने वाली नही है.मोदी और शाह को गुजरात की राजनीति के बारे में खूब अच्छे से पता है कि कांग्रेस का कौन सा गुट आपस में लड़ रहे है

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कांग्रेस की सबसे बड़ी मुश्किल

गुजरात की सत्ता से 33 साल से बाहर रहने के बाद कांग्रेस का कोई भी नेता अभी तक बीजेपी के सामने चुनौती नही बन पाया है. कांग्रेस के अर्जुन मोढवाडिया ,शक्ति सिंह गोहिल  सिद्धार्थ पटेल जैसे बड़े नेता भी मोदी के सामने नही टिक पाए थे यहाँ तक कि ये नेता अपनी सीट बचाने में असफल हो गये थे. वर्तमान  में कांग्रेस   के प्रमुख  भारत सिंह सोलंकी आधी सीट भी बचाने में असफल रहे. जबकि उनके पिता माधव सिंह सोलंकी 1985 में 182 में से 149 सीट जीतने  का  रिकॉर्ड है. आपको बता दे कि यह रिकॉर्ड नरेन्द्र मोदी भी नही तोड़ पाए है.शंकर सिंह वाघेला आरएसएस से भी जुड़े रहे है ऐसे में उनका मत पार्टी से कुछ अलग रहता था. लेकिन अहमद पटेल के कहने पर दिल्ली से वाघेला को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा . जिससे वाघेला ने पार्टी छोड़ देना ही सही समझा. ऐसे में कांग्रेस के लिए मुसीबत बड़ी हो रही है.

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वाघेला के सम्पर्क में विधायक 

दिलचस्प बात तो यह कि कांग्रेस के 51 विधायकों में शंकर सिंह वाघेला और उनके बेटे महेंद्र सिंह के अलावा वो विधायक भी शामिल है जो कि वाघेला के करीबी माने जाते है.हालाँकि कांग्रेस का दावा है कि चुनाव अहमद पटेल ही जीतेंगे. लेकिन वाघेला के एक बयान से बहुत कुछ साफ़ हो जिसमें उन्होंने कहा था कि “बापू कभी रिटायर नही होते”.

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सवाल अभी वही है कि अहमद पटेल को हराने के लिए बीजेपी इतना मेहनत क्यों कर रही है? दरअसल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी  सत्ता में वापस आना चाहती है और अगर राज्यसभा चुनाव हार गये तो कहीं न कहीं लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए नुकसान दायक हो सकता है. इस लिए बीजेपी आगामी चुनाव को देखते हुए तीनो सीटें जीतना चाहती है.