एशिया का महाबली बनने की चाहत में चीन हमेशा से अशांति फ़ैलाने वाले काम करता आया है. वह चाहता है कि एशिया में बस वही सबसे आगे हो और कोई नही लेकिन उसकी इसी सोच को भारत ने हमेशा मात दी है. भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर विवाद चल ही रहा था कि चीन के लिए एक और ऐसी खबर आई है जो उसके मंसूबों को झटका दे सकता है. दरअसल चीन हमेशा से विवादों को जन्म देता आया है. चाहे वो भारत से सटे सीमा का मामला हो या फिर पाकिस्तान के आतंकवादियों को बचाने का मामला हो या फिर साउथ चाइना सी में दादागिरी दिखाने का मामला हो. अब चीन जिस तरह से साउथ चाइना सी का दुरूपयोग कर रहा है उसको लेकर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने बड़ा बयान दिया है जिसकी चीन ने उम्मीद भी नही की थी.

Source

साउथ चाइना सी में चीन की घटिया चाल

दरअसल चीन साउथ चाइना सी में अपने फायदे के लिए वहां सैन्यीकरण को बढ़ावा दे रहा है. जिसे लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान खफा है. आपको बता दें कि चीन साउथ चाइना सी में विशालकाय आर्टिफिशल आइलैंड्स बना रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि वो इसका इस्तेमाल मिलिटरी बेस के रूप में करेगा.

Source

अमेरिका जापान और ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा

इस मामले को लेकर अमेरिका जापान और ऑस्ट्रेलिया ने चीन के प्रति सख्त रवैया अपनाते हुए कहा है कि ‘साउथ चाइना सी में आचार संहिता कानूनी रूप से बाध्यकारी होनी चाहिए और चीन को भी इसका पालन करना चाहिए. जिस तरीके से चीन साउथ चाइना सी में विशालकाय आर्टिफिशल आइलैंड्स बना रहा है उसको लेकर इन तीन देशों ने उसका घोर विरोध किया है.

Source

चीन वर्चस्व चाहता है लेकिन लगेगा झटका

चीन चाहता है कि साउथ चाइना सी में उसका ही वर्चस्व हो और उसकी इसी मंशा को समझते हुए अमेरिका ने उसकी निंदा करते हुए सख्त रवैया अपनाया है. अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और जापान के इस बयान के बाद चीन को झटका जरूर लगेगा, क्योंकि वो बड़ी चालाकी से इस आइलैंड्स का निर्माण करके अपना वर्चस्व बढ़ाना चाह रहा था लेकिन अब लगता है कि इन बड़े देशों के विरोध के बाद उसके मंसूबों पर पानी फिर जायेगा.

Source

इसलिए चाहता है साउथ चाइना सी पर कब्ज़ा

चीन हमेशा कहते आया है कि द्विपक्षीय संबंधों में तीसरे देश की दखलंदाजी बर्दाश्त नही की जाएगी. आपको बता दें कि साउथ चाइना सी के लगभग पूरे इलाके पर चीन अपना दावा करता है. वो ऐसा इसलिए भी करता है क्योंकि चीन का सालाना 5 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार यहां से होता है और यहाँ पर तेल और गैस के बड़े भंडार होने की भी बात कही जाती है.

Source

सिर्फ अमेरिका ऑस्ट्रेलिया जापान ही नही इन देशों ने भी किया है विरोध

ऐसा नही है कि चीन के इस कदम पर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने ही विरोध जताया है बल्कि उसके इस दावे को लेकर उसका फिलीपीन्स, वियतनाम और मलयेशिया, ब्रुनेई सहित आसियान के सभी 10 सदस्य देशों और ताइवान के साथ भी छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है.