भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय से ही इजराइल के साथ रिश्तों को मजबूत करने की कवायद शुरू हो गई थी. भारत ने 1950 में इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता दी थी जिसके बाद जनता पार्टी की सरकार में भारत ने इजराइल से रिश्तों को सुधारना शुरू किया था. भारत और इजराइल की दोस्ती के पीछे एक बड़ी वजह है दोनों के एक जैसे हालात, जैसे भारत आतंकवाद से परेशान है वैसे ही इजराइल भी और जिस तरह से भारत को उसके पड़ोसियों परेशान करते हैं वैसे ही इजराइल को भी. यही वजह है कि दोनों देश एक दूसरे की भावनाओं को बहुत अच्छी तरह से समझते है.

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भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी ने जब इजराइल का दौरा किया तो दोनों देशों के लोगों ने इस कदम का स्वागत किया. पीएम मोदी के इजराइल दौरे को एक महत्वपूर्ण कदम माना गया. इजराइल में इस वक्त बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार है. नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री का ऐसा स्वागत किया जैसा आजतक किसी भी देश के प्रधानमंत्री का नहीं किया, जब तक पीएम मोदी इजराइल में रहे नेतन्याहू भी उनके साथ रहे. किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला इजराइल दौरा था.

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जब भारत में जनता पार्टी की सरकार आई थी तो उसने इजराइल से रिश्ते सुधारने की कवायद शुरू कर दी थी. जनता पार्टी की सरकार के दौरान इजराइल के पूर्व रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री मोशे डेयान गुप्त रूप से भारत के दौरे पर आए थे. भारतीय जनता पार्टी के सांसद सु्ब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया है कि तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी खुलेआम इजराइल के रक्षा मंत्री को भारत बुलाने के लिए तैयार नहीं थे.

 

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अरब-इजराइल युद्ध जो कि 1967 में हुआ था, उसमें मोशे डेयान अपने देश के हीरो रहे थे. मोशे अपना नाम बदलकर भारत आए थे. मोशे ने तत्कालीन रक्षा मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से बातचीत की थी. सु्ब्रमण्यम स्वामी के अनुसार जब पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, ‘नहीं-नहीं कभी ऐसी मीटिंग नहीं हुई’ जबकि वो इस मीटिंग में मौजूद थे. बात स्पष्ट है कि अटल जी इजराइल से रिश्तों को सुधारना चाहते थे लेकिन उस समय की राजनीति को देखकर उन्होंने ऐसा कदम उठाया होगा.

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में इजराइल के साथ रिश्ते अच्छे हुए थे. अटल जी के दौर में जब इजराइल के पीएम एरियल शेरॉन भारत यात्रा पर आए थे तो भारत ने उनका तहेदिल से स्वागत किया था. तब से भारत-इजराइल संबंधो में एक नवीनता आ रही है. इजराइल और भारत के हालात एक जैसे हैं.

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जैसे भारत आतंकवाद से परेशान है वैसे ही इजराइल भी और जिस तरह से भारत अपने पड़ोसियों से परेशान है वैसे ही इजराइल भी. इसी के चलते भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री ने इजराइल जाने का फैसला लिया.

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आपको बता दें कि 1962 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध के समय तत्कालीन पीएम नेहरू ने इजराइल से हथियार और गोला बारूद की आपूर्ति के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेन गुरियन को पत्र लिखे थे. यहाँ से दोनों देशों के मध्य रक्षा संबंधो की शुरुआत हुई थी. जिसके बाद जनता पार्टी की सरकार में इजराइल के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री ने भारत का दौरा किया था.