गुजरात में कल राज्यसभा चुनाव के लिए वोट पड़े और गिनती भी होनी थी. पहले ही इस राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी में अपनी एक सीट बचाने के लिए मशक्कत चल रही थी. कांग्रेस विधायकों का पहले से बागी होना तय माना जा रहा था. ऐसे में जब कांग्रेस के 6 विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये तो कांग्रेस को अब अपने विधायको को बचाए रखने की चुनौती थी. अपने सभी विधायको को बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में भेज दिया .सच बात तो यह है कि मुकाबला अब बीजेपी और कांग्रेस में न होकर बीजेपी और कांग्रेस के चाणक्य में हो गया था. मतलब साफ़ है कि अमित शाह और अहमद पटेल दोनों काफी सुलझे हुए और राजनीतिक सूझबूझ वाले नेता है.

गुजरात में कुल 3 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना था. जिसमें से 2 सीटों पर बीजेपी के उम्मीद्वार अमित शाह और स्मृति इरानी की जीत तो पक्की थी. लेकिन एक सीट के लिए ही खींचतान चल रही थी. जिसके लिए दोनों ही पार्टियों के चाणक्य अपनी अपनी रणनीति के तहत काम कर रहे थे. जिसमें जीत अहमद पटेल की हुई है. लेकिन जीत इतनी आसान नही थी. दरअसल राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस के बीच देर रात तक हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनके विधायक वोट देने के बाद अपना वैलेट पेपर बीजेपी के एजेंट को दिखाया है. इस बात को लेकर कांग्रेस चुनाव आयोग पहुँच गई.

कांग्रेस के विधायकों ने बीजेपी को हारने के लिए दिया था वोट!

दरअसल कांग्रेस के जसदान से विधायक भोला गोहिल और जाम नगर ग्रामीण विधायक राघव जी पटेल के वोटो को चुनाव आयोग ने अवैध करार दे दिया. आरोप था कि इन दोनों विधायको ने अपना मत देने के बाद अपना वैलेट पेपर कांग्रेस के एजेंट को दिखाने के बाद बीजेपी के एजेंट को भी दिखा दी इसका वीडियो भी चुनाव आयोग के सामने रखा गया. इस तरह के केस में पहले भी वोट को रद्द किया जा चूका था. इसलिए कांग्रेस इस मसले को लेकर  चुनाव आयोग पहुँच गयी. कांग्रेस के बाद बीजेपी भी चुनाव आयोग पहुँच गयी. देर रात करीब 11 बजे चुनाव आयोग ने कांग्रेस के शिकायत को सही ठहराते हुए दोनों कांग्रेस के विधायको के वोट को निरस्त कर दिया.

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दोनों चाणक्य के बीच मचे इस घमासान में कांग्रेस के चाणक्य जीत कर भी हार गये. इतने सालों से इतनी बड़ी पार्टी के अध्यक्षा के सबसे करीबी नेता कहे जाने वाले अहमद पटेल को जीतने के लिए क्या क्या नही करना पड़ा. विधायको को हाइजैक करके रिसॉर्ट में रखना पड़ा. उन्हें रक्षाबंधन के दिन भी उन्हें घर नही जाने दिया गया बल्कि होटल में ही विधायको के परिवार वाले मिलने गये थे. एक एक वोट के लिए अहमद पटेल को कितनी मशक्कत करनी पड़ी. ऐसे मे साफ़ समझा जा सकता है कि कांग्रेस की स्थिति कितनी बुरी हो चुकी है.

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कांग्रेस के सभी नेता मिलकर गुजरात कांग्रेस के नेताओं को उनके कांग्रेस के साथ बीतो दिनों की याद दिलाई. कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने शंकर सिंह वाघेला को ट्वीट करके कहा कि याद कीजिये कांग्रेस ने आपके लिए क्या क्या किया है. हालाँकि वोट देने के बाद वाघेला ने साफ़ कर दिया कि उन्होंने अहमद पटेल के खिलाफ वोट किया है.अहमद पटेल 1989 के लोकसभा चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा था.

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सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के विधायको की चाल में फंस गये थे अमित शाह! दरअसल कहा जा रहा है कि कांग्रेस के विधायक ने वोट देने के बाद अपना बैलेट पेपर सोच समझ कर दिखाया था जो अहमद पटेल के जीत में सबसे बड़ा रोल निभा दिया. अगर इन दो विधायकों का वोट निरस्त न हुआ होता तो अहमद पटेल की हार तय मानी जा रही थी. लेकिन विधायको के वोट निरस्त हो जाने से अहमद पटेल को जरुरत वोटो की संख्या कम ही गयी जिससे उन्हें इसका फायदा मिल गया.