बीजेपी पार्टी के  अध्यक्ष अमित शाह  अपनी पार्टी के चाणक्य भी कहे जाते हैं, आज उन्ही की सूझ-बूझ की वजह से बीजेपी पूरे भारत में जीत रही है. भारत ही नहीं दुनियाभर में बीजेपी पार्टी ने अमित शाह की अध्यक्षता में नाम कमाया है और बेहतरीन ढंग से सत्ता को संभाला है.

 

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आपको बता दें अमित शाह ने हाल ही में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने वंशवाद को बढ़ावा दिया है. जो पार्टी एक परिवार के हित से ऊपर नहीं सोच सकती है वो देश के बारे में क्या सोचेगी.  उन्होंने आगे कहा कि “1982 में जब मैं  पार्टी से जुड़ा तो मैं एक बूथ सदस्य था, और किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बिना मैं बूथ अध्यक्ष से पार्टी अध्यक्ष बन गया. यह पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को दिखाता है’.

 

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ह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी के पहली पीढ़ी के नेता थे और उनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी. यह आंतरिक लोकतंत्र है.

 

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उन्होंने कहा कि क्या कोई मुझे बता सकता है कि मेरे बाद भाजपा अध्यक्ष कौन होगा? कोई नहीं बता सकता. लेकिन कोई भी यह आसानी से बता सकता है कि कांग्रेस में सोनिया गांधी के बाद अध्यक्ष कौन होगा?

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बीजेपी पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह इन दिनों चर्चा में है, उन्होंने पिछले 25 साल से बड़े ही बेहतरीन ढंग से बीजेपी पार्टी को सम्भाला हुआ है. आपको बता दें हाल ही में बीजेपी ने बिहार में अपनी सरकार बनाई है और इसमें भी सबसे बड़ा हाथ अमित शाह का माना जा रहा है. अमित शाह इस समय बीजेपी के अध्यक्ष है और पार्टी में अधिकांश काम सम्भाल रहे हैं.

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अमित शाह कौन हैं ? 

अमित शाह का पूरा नाम अमित अनिलचन्द्र शाह है और उनका जन्म 22 अक्टूबर 1964 में हुआ था, उन्होंने अपनी पढ़ाई मेहसाणा से की. इसके बाद बायोकेमिस्ट्री से ग्रैजुएशन करने के लिए वो अहमदाबाद चले गए. आपको बता दें अमित शाह के पिता पाइप का काम करते  थे और अमित शाह ने भी कुछ टाइम तक उनका काम सम्भाला था. अमित शाह ने बचपन में ही आरएसएस से अपना संबंध बना लिया और इसी के चलते उन्हें राजनीती में जगह मिली.

 

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तो ऐसे जुड़े बीजेपी से अमित शाह 

1982 का वो वक्त था जब मोदी और अमित शाह ने पहली बार आपस में मुलाकात की  थी उन दिनों में मोदी जी आरएसएस के प्रचारक थे.  अमित शाह  1983 में आरएसएस की स्टूडेंट विंग से जुड़े थे और इसके तीन साल बाद उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. सके बाद उन्हें वॉर्ड सेक्रेटरी, तालुका सेक्रेटरी, स्टेट सेक्रेटरी, वाइस प्रेजिडेंट और जनरल सेक्रेटरी जैसे पद संभाले. अडवानी की के लिए 1991 में प्रचार करने वाले अमित शाह ही थे. इसके बाद 1995 में पहली बार बीजेपी ने गुजरात में सरकार बनाई.

 

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जब अमित शाह और मोदी ने साथ मिलकर…

इन दिनों में अमित शाह और मोदी जी साथ रहते थे दोनों, गावं-गावं में जाकर कांग्रेस को हराने के लिए सबसे बेहतरीन नेता ढूंढते थे. कहते हैं उन्हीं दिनों से अमित शाह और मोदी की रणनीति के चर्चे हुए करते थे. इसी तरह दोनों ने मिलकर लगभग 8 हजार लोगों की एक टीम तैयार की थी.

 

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गुजरात दंगों में आया नाम ! 

इस बीच बीजेपी सरकार के वो काले दिन आये जिसकी वजह से सरकार को काफी परेशानी हुई, गुजरात दंगों में दोषी पाए जाने के बाद अमित शाह को जेल जाना पड़ा. कहा जाता है कि कांग्रेस ने उन्हें मोदी जी के करीबी होने के कारण निशाना बनाया था और इस केस में फंसाया था.

 

 

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सोहराबुद्दीन एंकाउंटर की वजह से गये अमित शाह दुबारा जेल ! 

सोहराबुद्दीन एंकाउंटर  एक ऐसी घटना थी जिसकी वजह से अमित शाह को 2010 में 90 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था और जेल की घटना ने आज उन्हें कांग्रेस का सबसे बड़ा दुश्मन बना दिया. साल 2015 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया.  बताया जाता है कि जेल में रहते हुए अमित शाह कैदियों को भगवत गीता सुनाते थे और उन्हें ज्ञान देते थे.  इस बीच अमित शाह ने कांग्रेस को खत्म करने की कसम खाई.

 

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अब हालत ये है कि 29 में से 18 राज्यों में बीजेपी सरकार है और केवल 6 राज्यों में कांग्रेस रह गयी है. ऐसे ही चलता रहा तो अमित शाह की सूझ-बूझ के सहारे कांग्रेस पूरी तरह से खत्म हो जायेगी.