देश को आजाद कराने में क्रांतिकारियों का योगदान

देश को आजाद कराने में कई सारे क्रांतिकारियों ने अहम् योगदान दिया था. देश को आजाद कराने में कुछ ऐसे क्रांतिकारी शामिल थे. जिसमें सरदार भगत सिंह, राजगुरु,चंद्रशेखर, अशफाक उल्ला खान और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे बड़े-बड़े क्रांतिकारियों को अपना प्रेरणादायक मानते थे. इन सभी क्रांतिकारियों ने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया. भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ दी और देश को आजाद कराने के लिए पूर्ण प्रयास किये थे. इन्ही लोगों के बलिदान ने देश को आजाद कराया.     bhagat singh

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देश के बड़े क्रांतिकारियों में से एक भगवती चरण बोहरा भी थे

देश के बड़े क्रांतिकारियों में से एक गुजरात की धरती से आने वाले भगवती चरण बोहरा भी थे. भगवती चरण वोहरा का जन्म जुलाई 1903 में आगरा में हुआ था। उनके पिता शिव चरण वोहरा रेलवे के एक उच्च अधिकारी थे। बाद में वे आगरा से लाहौर चले आये। उनका परिवार आर्थिक रूप से सम्पन्न था। भगवती चरण की शिक्षा-दीक्षा लाहौर में हुई। उनका विवाह भी कम उम्र में कर दिया गया। पत्नी का नाम दुर्गा था। बाद के दौर में उनकी पत्नी भी क्रांतिकारी कार्यो की सक्रिय सहयोगी बनी। क्रान्तिकारियो द्वारा दिया गया सन्बोधन एक आम सन्बोधन बन गया.

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लाहौर नेशनल कालेज में शिक्षा के दौरान भगवती चरण ने रुसी क्रान्तिकारियो से प्रेरणा लेकर छात्रो की एक अध्ययन मण्डली का गठन किया था। राष्ट्र की परतंत्रता और उससे मुक्ति के प्रश्न पर केन्द्रित इस अध्ययन मण्डली में नियमित रूप से शामिल होने वालो में भगत सिंह, सुखदेव आदि प्रमुख थे.

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भगवती का एक ही लक्ष्य था देश को आजाद कराना 

भगवती का एक ही लक्ष्य था कि देश को कैसे आजाद कराया जाए और आजाद कराने के लिए कैसे काम किया जाए. सन् 1926 में नौजवान भारत सभा की स्थापना की गई. भगवती ने ही उसका मेनीफेस्टो तैयार किया था. सन् 1928 में काकोरी काण्ड के बाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का फिर से गठन हुआ. जिसके बाद उसके प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी भगवती चरण को ही सौंपी गयी.

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बम बनाने में थे माहिर 

मेनीफेस्टो बनाने में भगवती ने चंद्रशेखर आजाद की मदद की और लाहौर के अधिवेशन में उसे जमकर बांटा. जब लाहौर में बम की फैक्ट्री पकड़ी गई तो एचएसआरए दो हिस्सों में बट गई थी.उस  दौरान एक हिस्से की जिम्मेदारी भगवती के थी और एक समूह की आजाद,यशपाल और कैलाशपति के जिम्मे थी. उस समय भगवती को एक महारत हासिल थी और वो थी बम बनाना. भगवती को बम बनाना बहुत अच्छे से आता था.

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सन् 1929 में जब भगवती ने एक दूसरी बम फैक्ट्री बनाने की योजना बनाई. भगवती ने उसके लिए फिर लाहौर में ही कश्मीर बिल्डिंग में एक कमरा किराये पर ले लिया था. उसी कमरे में भगवती ने बम फैक्ट्री की शुरुवात की. हम आपकी जानकारी बता दें कि भगवती ब्रिटिश वायसराय लार्ड इरविन पर हमला करना चाहते थे.

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23 दिसम्बर 1929 को जब लार्ड इरविन दिल्ली से आगरा के लिए ट्रेन में सवार होकर जा रहा था. तभी भगवती ने उसको निशाना बनाते हुए ट्रेन पर बम फेंक दिया. लेकिन गलती से बम दूसरी बोगी पर जा गिरा और इरविन बच निकला. बम इतना शक्तिशाली था जिससे ट्रेन की दो बोगियां बुरी तरह तबाह हो गयी थी.

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भगत सिंह को जेल से छुडवाने के लिए बनाया था बम लेकिन..

गौरतलब है कि इस घटना के बाद भगवती चरण बोहरा ने ‘फिलॉसफी ऑफ बम’ नाम से एक लेख लिखा जिसमें जेल में बंद भगत सिंह ने उनकी मदद की. आपको बता दें कि ज्यादातर क्रन्तिकारी गांधी जी के विचारों व तरीकों से सहमत नहीं थे. इसी वजह के कारण भगवती ने ‘फिलॉसफी ऑफ बम’ के द्वारा अपना संदेश पहुँचाने की कोशिश की थी. इस लेख के पर्चे छपवाए गए और उन्हें गाँधी जी के साबरमती आश्रम के बहार चिपका दिया था.

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प्लान कामयाब हो जाता तो भगत सिंह को फांसी..

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जब जेल में बंद थे. उस समय अंग्रेज उन्हें सजा-ए मौत देने वाले थे. तभी उसी दौरान भगवती चरण बोहरा ने जेल तोड़कर भगत सिंह को छुड़ाने के लिए एक प्लान तैयार किया. भगत सिंह को छुड़ाने के लिए भगवती ने एक बम बनाया था. जिसको जांचने के लिए एक प्रयोग करना था. लेकिन उसी दौरान वो बम फट गया और भगवती चरण बोहरा गंभीर तरह घायल हो गए थे. जिसके बाद में उनकी मौत हो गयी थी. मरने से पहले भगवती ने कहा था कि अगर उनकी मौत दो दिन के लिए टल जाती तो उन्हें भगत सिंह को निकालने में बड़ी कामयाबी हासिल हो जाती. ऐसा होने के बाद उनकी आखरी ख्वाहिश अधूरी ना रहती और भगत सिंह को फांसी न होती.