गोरखपुर के बाबा राघव दास हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से मरे बच्चों का किस्सा मानों कम दुखद नहीं था कि अब उस हादसे के बाद एक के बाद एक ऐसे किस्से सामने आ रहे हैं जिनको सुनकर इंसानियत पर से भरोसा सा उठ जाता है. इसी कड़ी में ऐसे कई किस्से आये, किसी में मृत बच्चों के परिजनों ने कहा कि उन्हें अपने बच्चों की लाश तक लेने में जद्दोजहद करनी पड़ रही है, तो कईयों ने ये तक कहा कि जब अस्पताल प्रशासन से अपने मासूमों का शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस मांगी गयी तो उनसे कहा गया कि, “छोटे बच्चे की ही तो लाश है, ऑटो में ले कर चले जाओ.”

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इस दुखद खबर के बीच आई थी एक राहत की खबर

इस दुखद हादसे को कई घंटे बीत गए लेकिन मामले पर अभी तक कोई पुख्ता सच निकल कर सामने नहीं आया. कोई ये बताने को तैयार नहीं है कि क्या वाकई ये ऑक्सीजन की ही कमी की वजह से हुआ है या फिर कोई और वजह है. खैर इसी बीच लोगों का इंसानियत से भरोसा उठने ही वाला था कि इस हादसे से जुड़ा एक मामला सामने आता है और लोगों को यकीन हो जाता है कि अभी इंसानियत मरी नहीं है.

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किस्सा था एक मुसलमान डॉक्टर का, जिनकी सच्चाई खौफनाक है 

अजीब लग रहा होगा सुनने में कि आखिर जीवन देने वाले डॉक्टरों को कोई कैसे मजहब में तौल सकता है, तो आपका ये शंसय भी थोड़ी देर में दूर हो जायेगा.

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गोरखपुर में हादसे के दौरान अपने फर्ज के अंजाम देने वाले डॉ कफील अहमद को उनके एक नेक काम के चलते सोशल मीडिया पर सलाम किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि डॉ कफील बाल रोग विशेषज्ञ हैं और हादसे के वक्त वो हॉस्पिटल में ही पोस्टेड थे.

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हादसा बेहद ही दुखद है, और इस बात की भी उम्मीद जताई जा रही थी कि आगे भी ऐसे मामले आ सकते हैं. ऐसे में इसी अनहोनी को होने से टालने के लिए डॉ कफील रात भर केवल अपने बलबूते पर ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बचाने में लगे रहे. एक खबर के अनुसार गुरुवार की रात करीब दो बजे डॉ कफील को सूचना मिली कि कुछ देर में ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी.

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ये बात सुनने की देरी ही थी कि डॉक्टर काफील को अंदाज़ा हो गया कि मामला काफी संगीन रुख ले सकता है. बिना वक़्त जाया किये डॉक्टर ने आनन फानन में अपने जानपहचान के डॉक्टरों के पास पहुंचे और ऑक्सीजन के तीन सिलेंडर अपनी गाड़ी में लेकर शुक्रवार की रात तीन बजे सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंच गए.

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बताया जा रहा है कि इन तीन सिलिंडरों से बालरोग विभाग में सिर्फ 15 मिनट ऑक्सीजन की ही आपूर्ति की जा सकी. इन तीन सिलेंडरों से रातभर किसी तरह से काम चल पाया गया, लेकिन सुबह सात बजे एक बार फिर ऑक्सीजन खत्म होते ही अस्पताल में स्थिति गंभीर हो गई. बताया जा रहा है कि इसके बाद भी डॉक्टर अपने पूरी क्षमता से स्थिति को संभालने में लगे रहे. अब उन्होंने शहर के गैस सप्लायर से फोन पर बात की.

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डॉ.काफील ने इस सन्दर्भ में बड़े अधिकारियों को भी फोन लगाया लेकिन किसी ने उनका फोन नहीं उठाया. डॉ. कफील अहमद एक बार फिर अपने डॉक्टर मित्रों के पास मदद के लिए पहुंचे और करीब एक दर्जन ऑक्सीजन सिलेंडर का जुगाड़ किया.

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अबतक मिली जानकारी के अनुसार इतना सब करने के बाद कफील अहमद ने बिना देरी किए अपने कर्मचारी को खुद का एटीएम दिया और पैसे निकालकर ऑक्सीजन सिलेंडर लाने को भी कहा. डॉ.कफील पूरे समय मरीजों के पास ही बने रहे. डॉ. कफील के इन प्रयासों को देखकर वहां मौजूद लोगों ने डॉक्टर के कोशिशों की काफी प्रशंसा की. सोशल मीडिया पर भी डॉक्टर को बतौर हीरो देखा जा रहा है.

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नर्स से बलात्कार के आरोपी हैं ‘मसीहा’ कफील अहमद  

लेकिन डॉक्टर कफील अहमद के बारे में अब जो जानकारी सोशल मीडिया पर आई है उसे सुनकर उस पर यकीन कर पाना मुश्किल है. हीरो बनने के बाद अब सोशल मीडिया पर कई लोगों ने डॉ कफील खान की भूमिका पर सवाल उठाये हैं. हाँ लेकिन ये कफील खान गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में तैनात डॉ कफील खान ही हैं या कोई और हम इसकी कोई प्रमाणिकता नहीं देते.

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क्या कहा जा रहा है सोशल मीडिया पर 

एक facebook पोस्ट की माने तो साल 2009 का एक वाकया है जिसके मुताबिक “मसीहा” डॉक्टर कफील उस वक़्त पहली बार विवादों से घिरे थे जब 2009 में नेशनल बोर्ड एग्जाम फॉर मेडिकल रजिस्ट्रेशन की परीक्षा के वक्त दिल्ली पुलिस ने डॉ कफील खान को दूसरे कैंडिडेट के बदले परीक्षा देने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें मणिपाल यूनिवर्सिटी की तरफ से निष्कासित कर दिए गए थे.

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दूसरी बार तब डॉक्टर कफील पर लोगों की नज़रे टिकी थीं जब डॉक्टर कफील अहमद पर अपने ही अस्पताल में काम करने वाली एक मुस्लिम नर्स के साथ बलात्कार के केस में 1 साल जेल की सजा हुई थी.

सायबर बुली नाम के एक यूजर ने कफील के बारे में लिखा है कि, “कफील खान ऑक्सीजन खरीदारी के इंचार्ज थे, सूत्रों के मुताबिक उसी ने कथित रुप से गैस सप्लाई करने वाली कंपनी का पेमेंट रोका, वो खुले रुप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का आदमी है.”

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ऋषि बागरी नाम के एक यूजर ने बताया कि, “डॉ कफील खान ऑक्सीजन वेंडर से कमीशन के लिए बात कर रहा था, इसलिए उसने पेमेंट रोक रखी थी.”