चीन और भारत के बीच चल रहे विवाद को लेकर अमेरिका भी चिंता में है. अमेरिका के साथ भी चीन के रिश्ते बिगड़ रहे हैं क्योंकि चीन साउथ चाइना सी में अपनी मनमानी कर रहा है जो अमेरिका के लिए खतरा है वहीँ दूसरी ओर भारत के साथ चीन डोकलाम मुद्दे में उलझा हुआ है और वहां भी वो अपनी मनमानी करने की कोशिश करना चाहता है, लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं है क्योंकि भारत उसे ऐसा करने नहीं देगा.

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आपको पता होगा कि कुछ समय पहले ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन गए थे. अजीत डोभाल ने चीन और भारत के बीच चल रहे विवाद को लेकर चीन में अपने समकक्ष और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी बातचीत की थी लेकिन, ऐसा लग रहा है कि चीन पर अजीत डोभाल की बातों का कोई असर हुआ नहीं हैं.

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ट्रम्प ने पीएम मोदी से की बात

भारत की ही तरह अमेरिका भी आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर चीन से चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक जरुरी ऐलान करने के लिए भारत के स्वतंत्रता दिवस को चुना. ट्रम्प ने पीएम मोदी को कॉल की और उन्हें स्वतंत्रता दिवस की बधाइयां दी. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दोनों मुल्क ‘सामरिक स्तर पर राय-मशविरा बढ़ाएंगे.’

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केवल औपचारिकता नहीं था ट्रम्प का कॉल

अमेरिका के राष्ट्रपति और पीएम मोदी के बीच ये वार्ता बहुत अहम है क्योंकि इस वक्त दोनों ही देशों में राजनीतिक उठापटक जारी है. एक तरफ ट्रम्प अमेरिका के शहर शैरलॉट्सविल में हुई हिंसा को लेकर निशाने पर हैं तो वहीँ गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत को लेकर पीएम मोदी की आलोचन हो रही है. ट्रम्प द्वारा पीएम मोदी को किये गए कॉल पर वाईट हाउस ने कहा कि पीएम मोदी को किया गया कॉल केवल औपचारिकता भर नहीं था. बयान में कहा गया कि ‘दोनों नेताओं ने इंडो पैसिफिक क्षेत्र में शांति-स्थिरता को बढ़ाने के लिए मंत्रालयों के बीच टु बाई टु डायलॉग शुरू करने के लिए प्रतिबद्धता जताई. इसके जरिए सामरिक राय-मशविरा को बढ़ावा दिया जाएगा.’

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हालांकि अमेरिका द्वारा दिए गए इस बयान में ये नहीं बताया गया कि आखिर किन मुद्दों पर ‘टु बाई टु’ डायलॉग होगा. भारत और अमेरिका के बीच बने ‘डायलॉग मेकनिजम’ के तहत सालाना सामरिक बातचीत काफी समय से नहीं हुई है. ‘टु बाई टु’ डायलॉग के तहत आम तौर पर दोनों देशों की कैबिनेट के हाई लेवल पदाधिकारी शामिल होते हैं.

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वैसे तो वाइट हाउस के द्वारा जारी किये गए बयान में चीन का ज़िक्र खुलकर नहीं हुआ है और ना ही डोकलाम मुद्दे का लेकिन इंडो पेसिफिक क्षेत्र में शान्ति और स्थिरता का ज़िक्र सीधे-सीधे हमारे पड़ोसी चीन की ओर ईशारा करता है. ट्रम्प के द्वारा उठाया गया ये कदम ओबामा सरकार की रणनीति का विस्तार है, जिसके तहत अमेरिका इस इलाके में भारत को अहमियत देता है और अलग पहचान देता है. ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच हुई इस बातचीत से चीन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि अमेरिका भी चीन पर लगाम लगाना चाहता है और भारत भी. इस बातचीत से ये बात भी साफ़ हो जाती है कि अमेरिका अब चीन की मनमानियों पर रोक लगाने के लिए भारत के साथ मिलकर कोई बड़ा कदम उठा सकता है.