गोरखपुर में लगभग 60 बच्चो की मौत से जहाँ एक तरफ देश के सरकार के खिलाफ आक्रोश था वहीँ दूसरी तरफ नेताओं ने राजनीति करने में भी कोई कसर नही छोड़ी. खबर थी कि गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत हुई है. लेकिन सरकार ने यह साफ़ किया कि बच्चों की मौत का कारण ऑक्सीजन नही है. हालाँकि सरकार ने माना था कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी थी. इस पर खूब राजनीति हुई लेकिन आज हम आपको बंगाल के एक ऐसे अस्पताल से रूबरू करवाने जा रहे है जहाँ नवजात बच्चों की मौत होती जा रही है और सब लोग शांत बैठे हुए हैं.

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दरअसल पश्चिम बंगाल जहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी है. कुछ राजनीतिक लोग उन्हें प्यार से दीदी कहते है उनके अस्पताल का हालत देखकर आपको आक्रोश आएगा.कोलकाता स्थित विधान चंद्र राय शिशु अस्पताल पूर्वी भारत में बच्चों का सबसे बड़ा सरकारी रेफरल अस्पताल है।हर यहाँ बच्चो की बड़ी संख्या में नवजात बच्चों की मौत होती है. बच्चों की मृत्यु होते रहने पर भी यहाँ खबर कभी सामने नही आ पाती.हो-हल्ला तब होता है जब मौतों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। इसके अलावा मुर्शिदाबाद और बदर्वान मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से भी नवजातों की मौत की खबरें अक्सर आती रहती हैं।

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इस बात यह साफ़ हो जाता है कि शिशुओ के लिए अस्पताल कितने बदहाली में है. बीसी राय शिशु अस्पताल में राज्य के विभिन्न हिस्सों से रोजाना कोई डेढ़ हजार लोग आते हैं, लेकिन डॉक्टरों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण अक्सर उनका सही इलाज नहीं हो पाता और अक्सर उनकी मृत्यु हो जाती है.

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नवजातों की मौत पर अस्पताल प्रबंधन की स्थायी दलील यह है कि विभिन्न संक्रामक बीमारियों से पीड़ित बच्चों को जब दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से यहां आते है उनकी हालत बेहद नाजुक होती है। उनके इलाज में देरी की वजह से मौत हो जाती है. कुछ साल पहले 24 घंटे में 40 बच्चों की मौत पर एक समिति ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में बुनियादी ढाँचे को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अस्पताल पर जरूरत से ज्यादा दबाव है.

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खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिसके उपर स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार है उस समय इस अस्प्ताल का दौरा कर क्लीन चिट भी दे दी थी. वहां के लिए अब यह सब आम बात हो चुकी है. कोई बड़ी खबर नही है. वाममोर्चा के 34 साल शासन काल के बाद अस्पताल पूरी तरह ध्वस्त हो चूका था सत्ता बदलने के बाद भी इसमें कोई खासा परिवर्तन नही आया है.

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अब सवाल यह है कि जो लोग उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुए बच्चो की  मौत पर राजनीति कर रहे थे उन्हें ममता दीदी का यह कारनामा भी देखना चाहिए और उसके उपर भी आवाज़ उठानी चाहिए. अस्पताल में बेड और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. उसकी आपूर्ति कराने के लिए ममता दीदी जवाब माँगा जाना चाहिए.

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अधिकारी भी अस्पताल में गड़बड़ी की बात तो मानते है लेकिन वो दावा भी करते है कि अन्य राज्यों की अपेक्षा पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है जहाँ के लोग सबसे ज्यादा सरकारी अस्पताल का फायदा उठाते है.भारी तादाद में लोग सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते है.वैसे राज्य के आम लोगों का अनुभव और चिकित्सा विशेषज्ञों की राय इसके विपरीत है। उनके मुताबिक, मध्यम या औसत आय वाले व्यक्ति भी बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की बजाय निजी क्लीनिकों व नर्सिंग होमों को ही तरजीह देते हैं।