पीएम मोदी ने भारत की विदेशनीति को मजबूत करने के लिए कई देशों की यात्रा की. अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के आरम्भ से ही उन्होंने विदेशी दौरे करने शुरू कर दिये थे. पीएम मोदी को पता था कि देश को सशक्त करने के लिए विदेशों से संबंध अच्छे बनाना बहुत जरुरी है इसीलिए उन्होंने नेपाल जैसे छोटे देश से लेकर अमेरिका जैसे सबसे शक्तिशाली देश का दौरा किया. उनके इन विदेशी दौरों को लेकर एक शख्स ने PMO से कई सवाल पूछे.

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दैनिक जागरण की खबर के अनुसार आरटीआई आवेदक कृतिवास मंडल ने पीएम मोदी के विदेश दौरों, इन यात्राओं में लगाए गए वक्त, इनसे होने वाले फायदों और अन्य बातों के बारे में जून 2016 में जानकारी मांगी थी. इसके जवाब में पीएमओ ने आवेदक को बताया था कि पीएम की विदेश यात्राओं और उनपर हुए खर्च के बारे में जानकारी उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध है. इसके बाद आवेदक CIC पहुँच गए और उन्होंने कहा कि उनको जो उत्तर मिला है उसमें कई सूचनाएं नहीं हैं जैसे कि विदेश में पीएम ने कितने घंटे बिताए.

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इसके बाद 10 अक्टूबर 2017 को सुनवाई में पीएमओ ने कहा कि, विदेशी दौरों से जनता को हुए लाभ की जहाँ तक बात है तो आवेदक को सूचित किया जाता है कि ये जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड का अंग नहीं है. मुख्य सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि, ‘प्रतिवादी (पीएमओ) ने कहा है कि विदेश यात्राओं के लाभ की गणना नहीं हो सकती और ये उनके रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है. विदेश यात्रा में लगे घंटे भी रिकॉर्ड में नहीं हैं.’ वहीं PMO ने कहा कि यात्राओं पर होने वाला खर्च भारत की संचित निधि से खर्च होता है.

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