भारत एक विशाल देश है. देश में 29 राज्य है 7 केंद्रशासित प्रदेश है. कुछ राज्य क्षेत्रफल की नजर तो कुछ जनसंख्या की नजर से काफी बड़े हैं . इन बड़े राज्यों के विकास के लिए हमेशा से यही धारणा रही है कि अगर इन्हें तोड़कर 2 या तीन राज्य कर दिए जाएँ तो इनका विकास जल्दी हो जाएगा. इस समय फिर एक राज्य का बंटवारा करके 2 राज्य बनाने की मांग जोर शोर से उठाई जा रही है. कई दिनों तक अलग राज्य की मांग को लेकर खूब प्रदर्शन भी हुआ. गोरखालैंड नाम के एक नए राज्य की मांग पर एक सन्देश इस समय खूब वायरल हो रहा है.

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 मोदी जी ने दे दी गोरखालैंड को हरी झंडी!

गोरखालैंड बनाने के लिए आन्दोलन कर रहे लोगो की मांग है कि उन्हें पश्चिम बंगाल से अलग कर दिया जाए. वो अलग राज्य चाहते है जिससे उनका विकास हो सके. जिसके लिए काफी दिनों तक उग्र प्रदर्शन भी हुआ था. लेकिन अब एक ऐसा सन्देश फैलाया जा रहा है जिसे पढ़कर हर कोई हैरान है कि क्या अब देश में 30 राज्य होंगे? क्या इसके लिए मंजूरी मिल गयी? सन्देश में प्रधानमंत्री का हवाला देकर कहा जा रहा है कि मोदी ने गोरखालैंड की मांग मान ली है

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अगले सत्र में पास होगा बिल 

वायरल किये गये सन्देश में कहा जा रहा है कि मोदी ने कैबिनेट की बैठक में गोरखा लैंड को नए राज्य बनाने की अनुमति दे दी है गृह मंत्री राजनाथ सिंह से इसके लिए तैयारी करने के लिए कहा गया है. गोरखा लैंड के सभी नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है और अगले महीने प्रधानमंत्री खुद गोरखालैंड आकर इसका एलान करेंगे. अगले सत्र में इससे जुड़ा बिल पेश किया जाएगा.इस सन्देश को सोशल मीडिया पर खूब वायरल किया जा रहा है.

जय गोरखा, जय मोदी का क्या मतलब ?

जब इस सन्देश के बारे में पता लगाया है कि आखिर इस सन्देश के पीछे की सच्चाई आखिर क्या है? क्या सच में अब गोरखालैंड देश का 30वां राज्य बनेगा? क्या प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी सच में इस राज्य को बनाने के लिए अनुमति दे दी है? इसके पीछे जो सच्चाई सामने आई जिसके बाद हर कोई हैरान रह गया? आखिर इस सन्देश को फैलाने के पीछे किसी का क्या मकसद हो सकता है? आपको बता दे कि सन्देश के अंत में लिखा है कि जय गोरखा,जय मोदी.

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न तो गोरखालैंड के पक्ष में और न ही समर्थन 

सच्चाई पता लगाने पर यह बात सामने आई कि नरेन्द्र मोदी ने इस तरह का कोई ऐलान नही किया है.जिसमें गोरखालैंड को नए राज्य बनाने की अनुमति दी गयी हो और न ही उन्होंने इस तरह की कोई मीटिंग की है.हमें जून 2017 का एक आर्टिकल मिला। इस आर्टिकल में बीजेपी महासचिव और वेस्ट बंगाल इंचार्ज का एक बयान दिया था जिसके मुताबिक, बीजेपी अलग गोरखालैंड बनाने के पक्ष में कभी नहीं है और न ही बीजेपी इसका सपोर्ट करती है। यह सन्देश एक अफवाह मात्र है.

पहले भी हुआ है बंटवारा 

इस बात से तो यह साफ़ हो गया है कि गोरखालैंड पर सरकार ने अभी तक कोई फैसला नही लिया है और न ही इस मामले पर चर्चा करने के लिए कोई कैबिनेट मीटिंग का आयोजन किया है.वैसे राज्य को विकसित करने में छोटे राज्य होने पर आसानी होती है. साल 2000 मे उत्तराखंड,छत्तीसगढ़ और झारखंड नए राज्य बनाये गये थे. सबसे नया राज्य तेलंगाना 2 जून 2014 को बनाया गया है. वैसे उत्तर प्रदेश के भी बंटवारे की मांग समय समय पर उठती रही है.