भारत के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ऐसे इंसान हैं जिसका लोहा दुनिया मानती है. मोदी जी ने दुनियाभर में घूमकर भारत का नाम रोशन किया है लेकिन उनके साथ-साथ हमेशा से ही उनके कपड़े चर्चा में रहे हैं. बात करें अगर हाल ही कि तो पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2017 के दिन सर पर एक साफा पहना तो बहुत ख़ास था.

 

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दरअसल इस बार पीएम मोदी ने  केसरिया और पीले रंग के साफे में लाल किले पर तिरंगा फहराया था. पीएम मोदी का साफा इस बार गुजारी स्टाइल का था और यह अब तक का उनका सबसे लम्बा साफा बताया जा रहा है. यही वजह है कि पीएम मोदी का यह साफा सबसे ख़ास था.

 

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बता द्दें इससे पहले भी प्रधानमंत्री तीन बार साफा पहनकर लाल किले की प्राचीर से देश की जनता को संबोधित कर चुके हैं. इस बार के साफे की लंबाई पहले पहने गए साफे से काफी ज्‍यादा थी जिसकी वजह से वो ख़ास था. वीडियो और फोटो को देखने में साफ़ पता चलता है कि साफा पीछे से इतना लम्बा था कि वो पैरों से थोडा ही ऊपर था.  देश के अलग-अलग हिस्‍सों में साफा को गरीब की शान का प्रतीक माना जाता है.

 

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जोधपुरी साफा

ज्ञात हो प्रधानमंत्री मोदी साल 2016 में जोधपुरी साफा पहनकर लाल किले पर तिरंगा फहराया था. तब उन्‍होंने बेहद सादा कुर्ता पहना था लेकिन लाल, गुलाब और पीले रंग के उनके जोधपुरी साफे ने सबका दिल जीत लिया था. यह जोधपुर का प्रसिद्ध गजशाही साफा था. इनमें सू्ती कपड़ों को सफेद, हरा, केसरिया, गुलाबी, पीले और लाल रंग की पट्टियों में ऐसा रंगा जाता है कि एक साथ एक कपड़े कई रंग में दिखते हैं. बता दें इस साफे को प्रधानमंत्री ने खुद पसंद किया था. 2016 में अलग-अलग तरह के पांच साफों को पीएम निवास भेजा गया था. उन साफों में से पीएम ने नौ मीटर लंबे केसरिया पट्टी वाले गजशाही साफे को पसंद किया था.

 

 

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जयपुरी साफा

अपने पापड़ों के लिए चर्चा में रहने वाले पीएम मोदी ने साल 2015 में 86 मिनट तक भाषण देकर नया रिकॉर्ड बनाया था. इसे लाल किले की प्राचीर से दी गई सबसे लंबी स्पीच कहा गया था. यह पहली बार था जब पीएम मोदी के साफे की ओर लोगों का ध्यान था. उस साफे में हरी और लाल धारियां थीं. साफे के पिछले हिस्से की लंबाई पीएम मोदी की कमर तक थी.

 

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लहरिया साफा

जब साल 2014 में पीएम बने नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर र पहली बार झंडा फहराया तब वह पूरी तरह तिरंगे के रंग में नजर आए थे. मोदी ने सफेद कुर्ते-पायजामे के साथ राजस्थान के बांधनी प्रिंट का केसरिया साफा पहना था. तिरंगे के तीसरे रंग को उनके लिबास में शामिल करने के लिए साफे का किनारा हरा रखा गया था.

 

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