कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार 16 अगस्त को कर्नाटक में गरीबों के लिए इंदिरा कैंटीन का उद्घाटन किया था. कैंटीन का उद्घाटन करते समय राहुल गाँधी ने यह भी कहा था कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो बड़े घरों में रहते हैं उनके लिए खाना बड़ा मुद्दा नहीं है लेकिन जो लोग आम इंसान हैं ऑटो चलाते हैं, लेबर का काम करते हैं और उनके पास इतने पैसे नहीं की महंगा खाना खरीद सकें. इसलिए यह कैंटीन उन गरीब लोगों को सेवा देने के लिए खोली गई है ताकि लोग भूखे न रहें.

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यहाँ पढ़े इससे पहले भी हो चुका है इंदिरा कैंटीन पर बड़ा खुलासा

राहुल गाँधी ने उद्घाटन के दौरान कहा था कि मैं चाहता हूँ कि शहर में जितने भी कमज़ोर और गरीब तबके के लोग हैं उन लोगों को भर पेट खाना मिल सके ताकि वे लोग भी खाने की चिंता न करते हुए अच्छे से अपनी कमाई पर ही ध्यान दे सकें, क्योंकि हर गरीब की पहली चिंता यही होती है कि वो क्या खायेगा अगर उसकी कमाई नहीं हुई तो.

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ऐसे में अब इसी इंदिरा कैंटीन को लेकर हुआ है ऐसा खुलासा जिसे जान आप को भी कांग्रेस की नियत का पता चल जायेगा 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बेंगुलुरु में कोई रेस्तरां खोलना आसान काम नहीं है. यहां रेस्तरां खोलने के लिए बहुत सी कागजी कार्यवाही पूरी करनी पड़ती हैं, काफी सारे इंतजाम करने पड़ते हैं. बता दें कि इसके लिए सबसे पहले लेबर विभाग से दुकान या स्टॉल का लाइसेंस लेना पड़ता है और उसके बाद जरूरत पड़ती है बीबीएमपी के ट्रेड लाइसेंस की.

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बताया जाता है कि इतना कुछ करने के बाद आपको फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी(FSSAI) से लाइसेंस लेना पड़ता है. मामला यहीं नहीं रुकता. इस पूरे प्रक्रिया में आपको भ्रष्ट पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को लगातार रिश्वत भी देनी पड़ती है, लेकिन हर मामले में ऐसा नहीं है, अगर सरकार आपकी है तो आपको इन प्रक्रियाओँ से गुजरने की कोई जरूरत नहीं.

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बिना FSSAI लाइसेंस के चल रहीं 101 इंदिरा कैन्टीनें

ऐसे में इंदिरा कैंटीन से जुड़ी एक बड़ी खबर ये आ रही है कि जो पिछले हफ्ते कांग्रेस ने 101 इंदिरा कैन्टीनें खोलीं , वो बिना FSSAI लाइसेंस के चल रही हैं. इससे भी ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि इन कैन्टीनो को चलाने वाले और कई बड़े अधिकारियों को इस बारे में कोई जानकारी भी नहीं है.

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इस बात से तो यही मतलब निकलता है कि मानो वे नहीं जानते कि कैन्टीन चलाने के लिए लाइसेंस की जरूरत भी पड़ती है. जानकारी के लिए बता दें कि फ़ूड सेफ्टी एक्ट के सेक्शन 31(1) के अनुसार किसी को भी FSSAI के लाइसेंस के बिना फूड बिजनस करने की इजाजत नहीं है.

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कर्नाटक के फूड सेफ्टी कमिश्नर मनोज कुमार मीणा से जब इस मामले से जुड़े मुद्दे पर बात की गयी तो उन्होंने बताया कि, “फूड सेफ्टी व स्टैंडर्ड्स के मानकों के तहत इंदिरा कैन्टीनों का रजिस्ट्रेशन भी बाकी रेस्तरां की तरह ही किया जाना चाहिए था.

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यहाँ बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि उन्होंने पूछे जाने पर ही ऐसा क्यों कहा? इससे  पहले भी तो वो कायदे से इस बात का ध्यान रख सकते थे? हालाँकि बीबीएमपी में एग्जेक्यूटिव इंजिनियर नंदीश जेआर ने इस झोल के पीछे भी एक ‘लॉजिक’ दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को इस तरह के आउटलेट्स खोलने के लिए किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ती है.

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बताते चलें कि नंदीश इंदिरा कैन्टीनों के नोडल इन्चार्ज हैं. उन्होंने अपनी सफाई में आगे कहा कि, “प्राइवेट कैन्टीनों को लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है क्योंकि सरकार उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर ये बात सुनिश्चित करती है कि जनता को जो खाना परोसा जा रहा है वह सुरक्षित है भी या नहीं. हालाँकि इंदिरा कैन्टीन सरकार का ही प्रॉजेक्ट है, इसलिए इसके खाने में किसी समस्या का सवाल ही नहीं खड़ा होता.”