एशिया में इन दिनों कई मुद्दे गर्म हैं जैसे भारत-चीन के बीच चल रहा सीमा विवाद, पाकिस्तान में नवाज़ की सरकार गिरने के बाद बना माहौल, साउथ चाइना सी में चीन की मनमानी और अफगानिस्तान के हालात. इन सब मुद्दों को लेकर भारत समेत दुनिया के कई मुल्क चिंतित हैं. अफगानिस्तान को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प की चिंताएं सामने आने लगी हैं उन्होंने अफगानिस्तान में अपनी नीति का ऐलान करते हुए एक तरफ जहां पाकिस्तान को कड़े लहजे में चेतावनी दी है तो वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए भारत से मदद की मांग की है.

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ट्रम्प ने सैन्य कमांडर के तौर पर अमेरिका की सेनाओं को संबोधित करते हुए दक्षिण एशिया के बारे में अपनी नीति को साफ़ किया इस नीति के तहत उन्होंने ये बात भी कही कि इसका अहम हिस्सा भारत के साथ रणनीतिक साझीदारी को और बढ़ाना है.

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ट्रम्प ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान को इराक नहीं बनाया जा सकता. इसी वजह से उन्होंने जल्दबाज़ी  में सेना की वापसी की बात को भी नकारा. इसके साथ ही पाकिस्तान को ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर वो आतंकवादियों को शरण देना जारी रखता है तो उसे बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे. ऐसे में सवाल ये उठता है कि भारत से अमेरिका क्या मदद चाहता है और उसकी अफगानिस्तान-पाकिस्तान नीति क्या है.

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भारत से इसलिए अमेरिका चाहता है मदद

भारत और अमेरिका अच्छे दोस्त हैं और दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते भी मजबूत हैं. ट्रम्प ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और अमेरिका का अहम सुरक्षा साझेदार भी है. ट्रम्प ने आगे प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में स्थिरता लाने में अहम योगदान दिया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत आर्थिक सहयोग एवं विकास के क्षेत्र में अमेरिका की मदद करेगा ताकि अफगानिस्तान में हालात ठीक हो सकें.

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ट्रम्प ने अपने भाषण में पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि, ‘पाकिस्तान को अफगानिस्तान में हमारी कोशिशों में साझेदार बनने से बहुत कुछ हासिल करना होगा. आतंकवादियों को शरण देना जारी रखने पर उसे बहुत कुछ खोना होगा.’ ट्रम्प ने इस बात का ज़िक्र भी किया कि भारत-पाक परमाणु संपन्न देश हैं, जिनके तनावपूर्ण संबंधों के संघर्ष में बदलने का खतरा है.

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अमेरिका ने भारत से उम्मीद जताई है कि वो उसकी मदद करेगा. अमेरिका जैसा विकसित देश भी आज भारत से मदद की उम्मीद करता है. ऐसे में चीन की आँखों से भी भारत को लेकर गलतफहमी की पट्टी हट गई होगी. चीन को भी पता चल गया होगा कि भारत से उलझना उसे कितना भारी पड़ सकता है. चीन की नींद खुल गई होगी और उसे पता चल गया होगा कि डोकलाम विवाद में उसे कुछ हासिल नहीं होगा. आज अमेरिका, भारत की मदद मांग रहा है जिसका साफ़ मतलब है कि जब भारत को उसकी जरुरत होगी तो वो भी भारत के साथ होगा. ऐसी परिस्थिति में चीन पर खतरे के बादल मंडरा सकते हैं.