प्रत्येक पिता अपने बेटे के अच्छे भविष्य की कामना करता है. उसको जीवन में किसी भी प्रकार की कोई समस्या न आये, इसके लिए पिता अपने बेटे के भविष्य में लिए कठिन परिश्रम करके पैसे जमा करता है और अपने बेटे की जरूरतों को पूरा भी करता है.

आज हम आपको एक ऐसे अरबपति पिता के बारे में बताने जा रहे है, जिसने अपने बेटे को जिंदगी का सबक सीखने के लिए 7000 रूपये दिए और घर से बाहर निकाल दिया था. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस वक्त इनका 6 हजार करोड़ रूपये का हीरे का व्यापार है. इनका नाम सावजी ढोलकिया है और इन्होनें अपने 21 साल के बेटे द्रव्य को जिंदगी का पाठ पढ़ाने के लिए 7 हजार रूपये देते हुए साथ ही कुछ ऐसा बोल दिया जिसे सुनते ही बेटे के मन में पिता की कही हुई बात धर कर बैठ गई…

सावजी ढोलकिया ने अपने बेटे को जिंदगी का सबक सिखाने और अपने पैरो पर खड़ा होने के लिए सलाह दी थी. सावजी ढोलकिया ने अपने बेटे को घर ने निकालने से पहले 3 सलाह दी थी पहली ये की कभी भी किसी भी काम को पाने के लिए मेरे नाम का सहारा मत लेना और ना ही कभी अपनी पहचान किसी को बताना , दूसरी ये की किसी भी स्थान पर एक सप्ताह से ज्यादा रूककर काम मत करना, तीसरी ये की जो 7 हजार रुपयों दिए गए है उनको तभी खर्च करना जब कभी आपातकाल की समस्या आ जाये वरना प्रतिदिन जीने के लिए इन पैसो को खर्च मत करना.

हमेशा पैसो में खेलने वाले द्रव्य के हाथ में जब उसके पिता ने 7 हजारो रूपये रखे और घर ने बाहर भेज दिया, तो द्रव्य को शुरू में काफी समस्याओ का सामना करना पड़ा था. कई बार तो द्रव्य ने यह भी सोचा की वह सबकुछ छोड़कर कही चला जाए, पर उसने हिम्मत नहीं हारी और आने वाले परिस्थिति का सामना करने की सोची.

संघर्ष की शुरुवात करने के लिए द्रव्य ने कोच्ची शहर को चुना. कोच्ची में अधिकतर लोग हिंदी नहीं बोलते थे, द्रव्य को यहाँ पर कई परेशानीयों का सामना करना पड़ा. आख़िरकार द्रव्य को एक जगह पर 4 हजार रूपये वाली नौकरी मिल गई और जिंदगी में आने वाली समस्यायों का डटकर सामना करने के लिए द्रव्य तैयार हो गया.

सावजी ढोलकिया एक बहुत बड़े हीरे के कारोबारी है. जितने बड़े वो व्यापारी है उतना बड़ा ही वो दिल भी रखते हैं. वो हर दीवाली में अपने कर्मचारियों को महंगे तोहफे, कार, फ्लैट, हीरे जेवरात देते रहते है, पर अपने बेटे को सबक सिखाने के लिए उन्होंने 7 हजार रूपये देकर अपने पैरो पर खड़ा होने के लिए अकेला छोड़ दिया था. इसे कहते हैं देश का भविष्य और ठीक इसी तरह हर इंसान आगे बढ़ पायेगा जब उसे खुद अपने पैरों खड़ा होना आ जाए तब. कहते हैं न बेटा अगर बाप के नाम से जाना जाए तो क्या फायेदा बल्कि पिता को बेटे के नाम से जाना जाए वो ही आपकी सफलता की निशानी है.