भारत में कई बाबा हैं और इन बाबाओं के कई भक्त हैं. इन बाबाओं की सच्चाई जाने बगैर ही लोग इन पर विश्वास करने लग जाते हैं. जिसके बाद ये बाबा लोगों की भावनाओं के साथ खेलते हैं. इन बाबाओं को ज्ञान तो कुछ नहीं होता लेकिन ये लोग दूसरों को बहकाने में माहिर होते हैं. इन्हीं बाबाओं में से एक हैं बाबा राम रहीम जिनको लेकर कल कोर्ट ने फैसला सुना दिया है.

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साध्वी द्वारा चल रहे बाबा राम-रहीम पर रेप केस के मामले में शुक्रवार को सीबीआई की स्पेशल अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए बाबा पर आरोप पर सिद्ध कर दिया है. बाबा पर उनके ही आश्रम में रहने वाली एक युवती साध्वी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था. केस पर सुनवाई करते हुए पंचकूला कोर्ट ने बाबा को दोषी करार दे दिया है. इस मामले में सोमवार 28 अगस्त को सुनवाई होगी.

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हरियाणा से लेकर पंजाब तक हुए हिंसा को लेकर हर कोई गुस्से में हैं और किसी की जुबांन पर कोई न कोई सवाल है कि आखिर एक बाबा जो एक नंबर का बदचलन है उसके लिए इतनी अन्दभक्ति क्यों ? आख़िरकार अंत में 15 से चल रहे केस में बाबा को दोषी ठहरा ही दिया गया लेकिन बाबा को महेल से जेल तक पहुंचाने में इस सीबीआइ ऑफिसर का बहुत बड़ा हाथ है जिसे इस केस को बंद कर देने की न जानें कितनी बार जान से मार देने की धमकी मिली होगी.

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जी हाँ उस सीबीआइ ऑफिसर का नाम है डीआइजी मुलिंजा नरायनन जिन्होंने कई रसूखदारों और राजनेताओं की लाख कोशिशों के बावजूद भी अपना ईमान नहीं गिराया और एक दोषी को उसके कर्मों की सजा दिलवाकर ही माने.

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सूत्रों का कहना है कि सीबीआइ ने 2007 में डीआइजी मुलिंजा नरायणन को यह केस सौंपा था और तभी से उनपर इस केस को बंद करवाने का बहुत बड़ा दबाव था लेकिन फिर भी वे नहीं मानें और आज इस केस को सफलता भी मिली.

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डीआइजी मुलिंजा नरायणन कहते हैं कि जब उन्हें इस केस की जांच सौपी गयी थी तब केवल डेरा के समर्थकों की तरफ से ही दबाव नहीं आ रहे थे बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिज्ञों की तरफ से भी इस केस को बंद करने का दबाव आना शुरू हो गया था.

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इतना ही नहीं डीआइजी नरायणन ने तो एक बार का किस्सा बताते हुए कहा की जिस दिन उनके पास यह केस आया था तभी उसी दिन एक वरिष्ठ अधिकारी उनके कमरे में आये थे और उन्होंने नारायण से कहा था कि यह केस आपको सिर्फ इसलिए दिया जा रहा है ताकि आप इसे बंद कर दें लेकिन इसी के जवाब में नरायणन ने अपने वरिष्ठ अधिकारी को साफ तौर पर कह दिया था कि वो जांच को बंद नहीं करेंगे और इसके साथ ही वे उनका कहना भी नहीं मानेंगे.

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डीआइजी नरायणन को इस मामले में दबाव बनाने वाले केवल उनके सीनियर अधिकारी ही नहीं थे बल्कि बल्कि हरियाणा के कई एमपी और साथ ही कई वरिष्ठ राजनेता भी शामिल थे. लेकिन डीआइजी नरायणन अपने इरादों में अटल थे इसलिए उन्होंने सभी को साफ तौर पर स्पष्ट कर दिया था कि मामले की जांच हाइकोर्ट के आदेश पर हो रही है इसलिए उनपर फ़ालतू का दबाव न बनाया जाये.

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कहते हैं गुंडों और राजनेताओं का कोई धर्म और ईमान नहीं होता अपना काम करवाने के लिए वे लोग किसी भी हद तक गिर जाते हैं. ठीक इसी तरह डीआइजी नरायणन को भी धमकी देने के लिए डेरा के समर्थकों ने उनका आवास भी खोजने की कोशिश की थी और लगातार आये दिन धमकियाँ देते ही रहते थे.

 

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डीआइजी नरायणन ने बताया है कि यौन शोषण के मामले में यह एक पहला ऐसा मामला है जिसमें पीड़िता सामने नहीं आई है,पीड़िता द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर यह केस सामने उभर कर आया है. पीड़िता के बारे में जानकारी हांसिल कर पाना बेहद मुश्किल था इसलिए केवल उनके पत्र के आधार पर ही केस की कार्यवाई हुई है.

इस केस से जुड़ी केवल एक ही जानकारी मिली थी कि चिट्ठी पंजाब के होशियारपुर से लिखी गई थी लेकिन इस चिट्ठी के पीछे शख्स कौन था ये नहीं मालूम हो सका था. जब अंत में मालूम हुआ भी तो पीड़ित और उसके परिवार को मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने में कामयाबी मिली.