देश में कई दिनों से चल रहे बाबा राम रहीम के मुद्दे के बीच सोमवार 28 अगस्त को महीनों से चल रहे भारत-चीन के डोकलाम विवाद पर एक राहत की ख़बर आती है. ख़बर थी कि पीएम मोदी के प्रयासों के चलते आखिरकार चीन झुकने को तैयार हो चुका है, लेकिन अब इसी मुद्दे पर एक और बड़ी ख़बर भी आर है है. दरअसल अब डोकलाम विवाद ख़त्म होने की असली वजह आई सामने, सिर्फ पीएम मोदी की मेहनत ही नहीं बल्कि…

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सोमवार 28 अगस्त को डोकलाम विवाद पर एक खबर आई कि भारत और चीन के बीच डोकलाम में करीब ढाई महीने से जारी विवाद आखिरकार सुलझ गया है. इस फैसले के बाद तय हुआ कि सुलह के बाद दोनों पक्षों ने इस विवादित इलाके से अपनी-अपनी सेनाओं की तमाम साजो-सामान के साथ वापसी स्वीकार कर ली है.

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…लेकिन जहाँ डोकलाम विवाद सुलझने की ख़ुशी में देश जश्न ही मना रहा था इसी बीच अब इस मुद्दे पर देश में ही मौजूद सैन्य और सामरिक मामलों के विशेषज्ञ इसे डोकलाम में विवाद का अस्थाई निपटारा ही कह रहे हैं. उनका मानना है कि सर्दियों का मौसम खत्म होने के बाद चीन की तरफ से इस इलाके में एक बार दोबारा विवाद खड़ा किया जा सकता है. हाँ लेकिन डोकलाम पर चीन के इस तरह से पैर वापिस खींचने के फैसले को कूटनीति के मोर्च पर भारत की जीत भी माना जा रहा है.

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क्यों माना जा रहा है इसे अस्थायी सुलह 

जानकारी के लिए बता दें कि वायुसेना के वरष्ठि सेवानिवृत अधिकारी एयर मार्शल बी़ के पांडे्य ने कहा है कि, “चीन ने अपने बयान में डोकलाम में सड़क बनाने के काम को रोकने का कोई ज़िक्र नहीं किया है. बता दें कि ये सड़क ही भारत की आपत्ति की वजह थी जिसके चलते ये विवाद शुरू हुआ था.

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क्यों पलटी मार सकता है चीन 

चीन का ये कदम इस समय एक अस्थायी समाधान ही माना जा सकता है. इसके पीछे एक बड़ा कारण ये भी बताया जा रहा है कि सितंबर महीने के पहले सप्ताह में बीजिंग में ब्रक्सि देशों की बैठक होने वाली है. ऐसे में विवाद की वजह से अगर कोई पड़ोसी सदस्य देश ब्रक्सि बैठकों में भाग नहीं लेता है तो विश्व मंच पर चीन की बहुत बड़ी किरकिरी हो सकती थी. माना जा रहा है कि शायद इसीलिए चीन ने अभी कदम पीछे खींचे हैं.

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दूसरी बड़ी वजह: ये हो सकती है चीन की अंदरुनी राजनीति

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में चीन ने विदेशी सीमा से लगने वाले इलाकों में विकास पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दिया है. चीन की इस नीति से उसके आंतरिक राज्यों में विकास की उपेक्षा हुई है जिसकी वजह से लोगों में काफी गुस्सा है. इस मुद्दे पर चीनी थिंक टैंक का ये भी मानना है कि नवंबर में होने वाले चुनाव के मद्देनजर सरकार किसी तरह से लोगों के गुस्सा का सामना करने की हालत में नहीं है. ऐसे में हर मायनों में चीनी सरकार के लिए ये ही बेहतर था कि वो डोकलाम मुद्दे को किसी भी तरह से सुलझाए.