अमीर खानदान की बेटी थी, पिता देश के जानेमाने राजनेता थे. विदेश में पढ़ाई के दौरान से ही सुर्ख़ियों में रह चूँकि थी. अमेरिका के हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में पढने के बाद इंटरनेशनल लॉ एंड डिप्लोमेसी कोर्स के लिए ऑक्सफोर्ड चली गयी लेकिन सबकुछ छोड़कर वापस स्वदेश लौटकर महज 35 साल की उम्र देश की प्रधानमंत्री बन गयी और रैली संबोधित करते हुए मजाह 54 साल की उम्र में आत्मघाती हमला कर आतंवादियों ने उनकी निर्मम हत्या कर दी. हम बात कर रहे है बेनजीर भुट्टो की जो पाकिस्तान की 2 बार प्रधानमंत्री रह चुकी हैं.

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बेनजीर भुट्टो ने शुरुआती पढाई पाकिस्तान में करने के बाद आगे की पढाई के लिए विदेश चलीं गयी. पिता देश के जाने माने राजनेता थे. साल 1977 में स्वदेश लौंटी.उसके कुछ दिन ही बाद उनके पिता की सरकार का पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ज़ुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट हो गया वे चुनाव् जीत कर सत्ता में आये थे लेकिन उनके विरोधियों का आरोप था कि उन्होंने चुनाव में धांधली की है.इसके बाद सेना प्रमुख जिया उल हक ने सत्ता की बागडोर अपने हाथों में लेली और भुट्टों को बंदी बना लिया उनपर अपने सहयोगियों की हत्या करने का आरोप के चलते 4 अप्रैल 1979 को फांसी दे दी गयी.

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भुट्टो को फांसी देने के बाद सैनिक सरकार द्वारा बेनज़ीर को हिरासत में ले लिया गया। 1977 से 1984 के बीच बेनज़ीर अनेक बार रिहा हुई और अनेक बार कैद हुईं। 1984 में तीन साल की क़ैद के बाद उन्हें पाकिस्तान से बाहर जाने की अनुमति दी गई। उस समय वे लंदन जाकर रहीं। इसी समय 1985 में पेरिस में उनके भाई शाहनवाज़ भुट्टो की मौत संदिग्ध हालात में हो गई। अपने भाई की अंतिम क्रिया के लिए बेनज़ीर पाकिस्तान पहुँचीं, जहाँ सैनिक सरकार के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों का नेतृत्त्व करने के आरोप में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। लेकिन जल्दी ही उन्हें रिहा करने के बाद वहाँ आम चुनाव की घोषणा कर दी गई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बेनजीर भुट्टो कई बार भारत के ताकतवर प्रधानमंत्री कही जाने वाली इंदिरा गांधी से मुलाकात कर चुकी थी.इतना ही नही भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को अपना दोस्त भी मानती थी. दोनों के राजनीतिक परिवार से होने से दोनों के रिश्ते काफी अच्छे रहे.

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1988 में बेनजीर भुट्टों भारी मतों से चुनाव जीत कर आई और पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बन गयी. इसी के साथ वे किसी इस्लामी देश की पहली प्रधानमंत्री बनी. दो साल बाद 1990 में उनकी सरकार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति ग़ुलाम इशाक ख़ान ने बर्ख़ास्त कर दिया.1993 में चुनाव जीतने के बाद फिर उनकी सरकार बर्खास्त हो गयी. इस समय बेनजीर भुट्टो की लोकप्रियता शिखर पर थी.इस समय में पाकिस्तान का एक बड़ा तबका उन्हें भ्रष्टाचार और कुशासन के प्रतीक के रूप में देखने लगा। अनेक विश्लेषकों के अनुसार बेनज़ीर के पतन में उनके आसिफ़ ज़रदारी का हाथ रहा है, जिन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी. भ्रष्टाचार के आरोप मे बेनजीर भुट्टो देश छोड़ना पड़ा.

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वे 18 अक्टूबर 2007 में पाकिस्तान लौटीं। उसी दिन एक रैली के दौरान कराची में उन पर दो आत्मघाती हमले हुए जिसमें करीब 140 लोग मारे गए, लेकिन बेनज़ीर बच गईं थी। इसके कुछ ही दिन बाद 27 दिसम्बर 2007 को एक चुनाव रैली के बाद उनकी हत्या कर दी गई। उनकी हत्या तब हुई, जब वे रैली खत्म होने के बाद बाहर जाते वक्त अपने कार की सनरूफ़ से बाहर देखते हुए समर्थकों को विदा दे रही थीं। उनकी मौत से पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।