चीन में होने जा रहे BRICS सम्मलेन में चीन,भारत, साउथ अफ्रीका, रूस और ब्राजील  देशों के बीच बैठक होगी. जिसमें इन सभी देशों के प्रतिनिधी शामिल होंगे. यह बैठक हर साल आयोजित की जाती है और पिछले साल इस बैठक की मेजबानी भारत ने किया था. हाल ही में खबर आई थी कि चीन अपने मित्र देशों को इस बैठक में शामिल करना चाहता है जिससे बैठक में उसकी ताकत बढ़ सके लेकिन उसे सफलता नही मिल पाई थी. अब रूस ने के राष्ट्रपति ने एक बयान दिया है जिससे भारत के साथ चीन के लिए भी मुश्किले खड़ी कर सकती है.

Source

भारत और चीन दोनों के लिए मुश्किलें 

आपकी जानकरी के लिए बता दें कि ब्रिक्स देशों से बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ‘प्रतिबंध लगाने वाली नीतियों’ के खिलाफ खड़े होने को कहा है. पुतिन की यह अपील भारत और चीन के लिए मुश्किलें खड़ा कर सकता है जहां कंपनियां रोज ही बहुराष्ट्रीय संस्थाओं से डील करती हैं. इस अपील ने भारत और चीन दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं हैं.

Source

ब्रिक्स बैठक से ठीक पहले झटका!

रविवार को शुरू होने वाले ब्रिक्स सम्मलेन से ठीक पहले रूस राष्ट्रपति पुतिन ने एक लेख में कहा कि ‘रूस की इस पहल का मकसद बेहतर प्रतियोगिता के लिए BRICS देशों की एकाधिकार-विरोधी एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाले प्रभावशाली तंत्र का निर्माण करना है. बैठक से ठीक पहले पुतिन के इस बात का निशाना भारत और चीन के लिए था. उन्होंने आगे कहा कि  ‘हमारा उद्देश्य प्रतिबंधित व्यापारिक कार्यों के खिलाफ काम करने के लिए सहयोगी उपायों का पैकेज तैयार करना है.

Source

अपने अपने स्तर पर करें काम 

भारत की आईटी कम्पनियां बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ हुए समझौते पर काफी ज्यादा निर्भर रहती है.इनमें अधिकतर कंपनियां या तो चीन की है या तो चीन का इन्वेस्टमेंट शामिल है.वहीं पुतिन चाहते हैं कि BRICS देश अपने स्तर की साइबर सिक्यॉरिटी पर काम करें जो पश्चिमी तकनीक से अलग हो जो भारतीय कंपनियां पश्चिमी तकनीक पर ही काम करती हैं वो करना बंद कर दें.

Source

भारत और चीन के बीच चले विवादपर भी रूस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. रूस ने डोकलाम के मुद्दे पर तटस्थ रवैया अपनाया है। रूस ने भारत को बदनाम करने वाली चीन की नीति के बहकावे में आने से इनकार कर दिया है। इस मुद्दे पर मॉस्को के रुख का असर भारत और रूस रिश्तों पर भी पड़ेगा। इससे ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी की भूमिका भी प्रभावित होती है.रूसी एम्बेसडर ने बीजिंग में रशियन जर्नलिस्ट्स से ब्रीफिंग में कहा था, ‘भारत-चीन सीमा पर जो हालात हैं, उससे हमसब दुखी हैं।’