प्रधानमन्त्री मोदी चाहते थे कि 3 सितम्बर से चीन में होने वाले ब्रिक्स सम्मलेन में भाग लेने से पहले वो नये कैबिनेट मंत्रियों की लिस्ट फाइनल करके ही निकलें. इसके लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पूरे जोर शोर से तैयारी में जुट गये और 9 लोगों के नाम पीएम को सुझाये. आपको बता दें कि इन 9 लोगों में से एक चेहरा ऐसा भी है जो बीजेपी में पितामह कहे जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर चुके हैं. इतना ही नही वो अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते हैं और कई मौकों पर तो बीजेपी के आलाकमान से भी नाराज हो चुके हैं. इन सबके बाद भी उनका नाम मंत्री पद के नामित होना सबको चौंका रहा है.

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दरअसल हम आरके सिंह की बात कर रहे हैं जो बिहार के आरा सीट से सांसद हैं. बता दें कि राजनीति में आने से पहले आरके सिंह IAS ऑफिसर थे और एक समय में आडवाणी को भी परेशानी में डाल दिया था. बात 1990 की है, जब भाजपा में जान फूंकने और राम मंदिर का मुद्दा उठाने के लिए लाल कृष्ण आडवाणी रथ यात्रा कर रहे थे.

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सोमनाथ से शुरू हुई उनकी ये रथ यात्रा जब बिहार के समस्तीपुर में पहुंची तो उस वक्त समस्तीपुर के जिलाधिकारी के रूप में आरके सिंह कार्यरत थे. उस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी. कहा जाता है कि राजनीतिक विरोधी होने के चलते लालू प्रसाद ने आडवाणी को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया था.

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बस फिर क्या था मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का आदेश पाकर आरके सिंह ने लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को ब्रेक लगाने में अहम् भूमिका निभाई और आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया. आपको बता दें कि आरके सिंह कई बार भाजपा से नाराज भी होते रहे हैं लेकिन भाजपा के शीर्ष नेताओं ने उन्हें राजनीति में नया बताकर उनके द्वारा लगाये आरोपों को ख़ारिज कर दिया. फ़िलहाल इस कैबिनेट विस्तार में जिन चेहरों को मौका मिला है उसमें दो बिहार और दो यूपी से भी शामिल है, बताया जा रहा है कि सभी चेहरों को अगले लोकसभा चुनाव को लेकर एक रणनीति के तहत नामित किया गया है.