12 मार्च 1993 में हुए सीरियल ब्लास्ट केस में मुंबई की स्पेशल टाडा कोर्ट ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम समेत पाँच अन्य दोषियों को सजा सुनाई है. सीबीआई  ने पाँच आरोपियों में से 3 को फांसी की सजा दी है और अबू सलेम व करीमउल्ला शेख को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसी के साथ इन दोनों दोषियों पर दो- दो लाख का जुर्माना लगाया है.

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अबू सलेम को नहीं मिल सकती थी फांसी की सजा 

बता दें कि अबू सलेम को कोर्ट फांसी की सजा नहीं दे सकता है इसके पीछे बड़ी वजह है. गौरतलब है कि गैंगस्टर अबू सलेम को पुर्तगाल ने प्रत्यपर्ण संधि के तहत भारत को सौंपा था. पुर्तगाल से हुए करार की वजह से कोर्ट सलेम को फांसी की सजा नहीं दे सका.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सलेम और उसकी महिला मित्र अभिनेत्री मोनिका बेदी को तीन साल की लंबी क़ानूनी कार्यवाई के बाद पुर्तगाल ने 11 नवंबर 2005 को भारत को सौंपा था. पुर्तगाल ने अबू सलेम को भारत के लिए देने को कुछ शर्त रखी थी. प्रत्यर्पण की शर्त के अनुसार सलेम को दोषी पाये जाने पर न तो उसे मौत की सजा दी जायेगी न ही उसे 25 साल से अधिक हिरासत में रखा जाएगा.

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भारत ने पुर्तगाल को अबू सलेम के प्रत्यर्पण के समय यह आश्वासन दिया था जिसकी वजह से अबू सलेम को फांसी की सजा नहीं मिली है. सजा पर बहस के दौरान प्रॉसिक्यूशन ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी जिसके बाद कोर्ट ने अबू सलेम को उम्रकैद की सजा के साथ 2 लाख का जुर्माना लगाया है.