वो 1965 के सितंबर का महिना था जब पाकिस्तान ने भारत में घुसकर हमला करने की प्लानिंग बनाई. पाकिस्तान के बी-57 विमानों ने भारत के सैन्य ठिकानों पर बमबारी करने के लिए उड़ान भरी और उनके पीछे तीन सी-130 हरकुलस ट्रांसपोर्ट विमानों ने भी भारतीय सीमा की तरफ उड़ान भरी. हर विमान में पाकिस्तान स्पेशल सर्विसेज़ ग्रुप के साठ-साठ सैनिक मौजूद थे. इसी दौरान एक ऐसा वाक्या हुआ जिसे सुनकर आपको हंसी आ जायेंगी.

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पाकिस्तान से भारतीय सीमा की ओर आ रहे इन पाकिस्तानियों का लक्ष्य था भारत के हवाई अड्डों आदमपुर, हलवारा और पठानकोट पर रात के अंधेरे में पैराशूट के जरिए उतरना, भारत के हवाई अड्डों पर कब्ज़ा ज़माना और फिर वहां मौजूद भारत के विमानों को नष्ट कर देना. लेकिन सभी के सभी पकड़े गये और अफवाह फैला दो गयी कि भारतीयय सेना आज हमला कर सकती है.

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वहां ख़बर आई कि भारतीय छाताधारी सैनिक सरगोधा हवाई अड्डे पर उतारे जाने वाले हैं.इसी बीच पाकिस्तान के हेड क्वाटर ने कमांडो से लड़ा हुआ सी-130 विमान सरगोधा के लिए रवाना कर दिया. जब यह विमान सरगोधा के एअरपोर्ट पर रात के अँधेरे में उतरा तो वहां जरुरत से ज्यादा सावधान संत्री ने भारतीय पैरा ट्रूपर समझकर उनपर गोलिया चला दी.दोनों पक्षों में गोलियां चलने लगी इस गोली बारी में कितने लोग हताहत हुए है इसका पता नही चल पाया.

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इधर पकडे गये पाकिस्तानियों को आदमपुर में भी पाकिस्तानी सैनिकों का कोई मंसूबा कामयाब नहीं हो पाया. उनको एअरबेस से काफी दूर गिराया गया था जिसकी वजह से वो इकट्ठे नहीं हो पाए. रात में भौंकते हुए कुत्तों ने उनकी पोल खोल कर रख दी. सुबह अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने मक्के के खेतों में शरण ली लेकिन एनसीसी के युवकों ने उन्हें खोज निकाला. कुछ छाताधारियों को तो गुस्से में आए गाँव वालों ने ही मार डाला. पाकिस्तान के 180 छाताधारियों में से 138 को भारत ने बंदी बना दिया, 22 मुठभेड़ में मार दिए गए और करीब 20 वापस पाकिस्तान भागने में सफल हो गए