रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के मासूम बच्चे की हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है. मामला इतना संगीन हो चला है कि अब मृत बच्चे के माता-पिता ने भी इस मुद्दे की जांच सीबीआई से कराने की मांग उठाई है. जाहिर है प्रद्युम्न के घरवाले पुलिस और स्कूल की कहानियों पर विश्वास नहीं कर पा रहे और करें भी कैसे? उन्होंने एक ही झटके में अपना मासूम खो दिया और बजाय इसके कि स्कूल इसकी ज़िम्मेदारी ले, स्कूल तो सिर्फ अपनी साख बचाने में नज़र आ रहा है. शुक्रवार 8:45 मिनट पर खबर आती है कि प्रद्युम्न नहीं रहा, जिसके बाद मामला तूल पकड़ लेता है. जल्दबाजी में स्कूल से तीन लोगों की गिरफ़्तारी की जाती है और शाम तक खबर आती है कि कंडक्टर ही दोषी है.

source

लेकिन क्या वाकई ये मामला इतना सीधा है जितना नज़र आ रहा है या कुछ ऐसा भी है शायद जो अभी तक हम देख/समझ नहीं पा रहे? तो चलिए नज़र डालते हैं इस मामले से जुड़ी कुछ ऐसी बातों पर जिनपर भी ध्यान देना उतना ही ज़रूरी है जितना किसी और बात पर और साथ ही हम आपको बताते हैं स्कूल की नाकामी की वो बात भी जो मौत से पहले प्रद्युम्न ने अपने घर पर बताई थी. 

source

पहले जान लीजिये वो बात जो प्रद्युम्न ने अपने घरवालों को बताई थी.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने बताया है कि उनके बेटे ने उनको पहले भी इस बात की जानकारी दी थी कि बस का कंडक्टर भी आयेदिन बच्चों के वाशरूम में आता जाता रहता है. ऐसे में क्या ये स्कूल प्रशासन की एक बड़ी चूक नहीं है? आखिर जब अभिभावकों को स्कूल के अंदर नहीं जाने दिया जाता है तो एक बस कंडक्टर को इतनी छूट दी कैसे गयी? यहाँ ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि ये स्कूल की उसी छूट का नतीजा साबित हुआ कि आज प्रद्युम्न हमारे बीच नहीं है.

source

सोचने वाली बात ये भी है कि कंडक्टर ने इतनी आसानी से अपना गुनाह कुबूल भी कर लिया? या ये सिर्फ किसी और को बचाने की कोशिश है?

एक कंडक्टर है जो एक मासूम पर गलत नज़र डालता है, उसके साथ गलत करने की कोशिश करता है और नाकाम होने पर उसे मौत की नींद सुला देता है. कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. इतने बड़े काण्ड के बावजूद न ही उस कंडक्टर के माथे पर शिकन की एक लकीर नज़र आती है ना आँखों में शर्म, बस नज़रे झुकाए वो ये बात मान लेता है कि, “उस वक़्त मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी थी और मैंने बच्चे को दो वार में ही सुला दिया, हमेशा के लिए.” चाहिए तो भी इस बात पर यकीन करने का मन नहीं होता. जानकारी के लिए बता दें प्रद्युम्न की माँ ने भी इस बात को सिरे से ख़ारिज करते हुए पहले ही कह दिया है कि, “स्कूल प्रशासन कंडक्टर को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. असली दोषी कोई और ही है.”

source

तीसरा बड़ा झूठ: बच्चे के घाव कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं. 

प्रद्युम्न के घाव की जो तस्वीर सोशल मीडिया पर आई है वो इतनी विचलित कर देने वाली है कि हम उसे आपको दिखा नहीं सकते हैं हां लेकिन इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि प्रद्युम्न को वो घाव सब्जी काटने वाली चाकू से नहीं दिया जा सकता है. कंडक्टर ने अपने कबूलनामा में कहा कि उसने प्रद्युम्न पर उस चाकू से दो वार किये लेकिन घाव इतना गहरा है कि कोई भी कह देगा कि ये दो वार का घाव नहीं है. तो आखिर उस 15-20 मिनट में वाशरूम में ऐसा क्या हुआ होगा जिसके चलते एक मासूम को इतनी क्रूर सजा दी गयी हो?

source

स्कूल का चौथा शर्मनाक झूठ: घर जा कर टीचर ने प्रद्युम्न के माँ-बाप से कहा प्रद्युम्न ब्लू व्हेल की वजह से मरा है.

सुनकर ही आपकी रूह काँप जाएगी लेकिन ये सच है. कौन कहे कि इस मुश्किल की घड़ी में स्कूल वाले मृत बच्चे के परिवार के साथ खड़ा हों, इसके विपरीत स्कूल की एक टीचर बच्चे के घर जाती हैं और उसके रोते-बिलखते माँ-बाप से कहती हैं कि आपका बच्चा ब्लू व्हेल की वजह से मरा है. इस बात की सफाई देते हुए है प्रद्युम्न की माँ बताती हैं कि प्रद्युम्न उन बच्चों में से था ही नहीं जो फोन पर गेम खेले और फिर इस हत्या से पहले प्रद्युम्न के शरीर से ऐसे कोई घाव भी तो नहीं मिले हैं जिससे साफ़ हो कि प्रद्युम्न ब्लू व्हेल के चलते मरा है. तो आखिर टीचर ने इतनी बड़ी बात कही क्यों? क्या इससे साफ़ नहीं होता कि स्कूल प्रशासन सीधे तौर पर कुछ छुपाने में लगा है?

source

बच्चों से क्यों साफ़ कराये गए खून के धब्बे? 

ये बात तो शायद हम आप सभी जानते हैं कि सबूत नष्ट करना भी एक तरह से जुर्म ही होता है. ऐसे में स्कूल प्रशासन इस बात की क्या सफाई पेश करेगा कि आखिर उसने स्कूल के ही बच्चों से खून के धब्बे क्यों साफ़ कराये? चलिए एक बार को मान लीजिये कि बच्चे खून देखकर डर ना जायें ये सोच कर स्कूल ने ये कदम उठाया भी होगा तो आखिर बच्चों से ही खून साफ़ कराने का क्या मतलब हुआ? ये तो साफ़ तौर पर सबूत नष्ट करने की बात हुई, और अगर ऐसा है तो स्कूल वाकई कुछ ऐसा छुपा रहा है जो बेहद ही खौफनाक है.