राम रहीम के गलत कामों ने साधू-संतों के ऊपर से लोगों का विश्वास उठा दिया. खुद को भगवान मानने वाले राम रहीम के प्रकरण के बाद अब विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि संत यह सोचने लगे हैं कि एक-दो गलत धार्मिक नेताओं की वजह से पूरे समुदाय को शक की निगाह से देखा जा रहा है.

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विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा, ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का मानना है कि ‘संत’ की उपाधि का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है इसलिए परिषद ने यह उपाधि देने के लिए एक प्रक्रिया तय करने का फैसला किया है.’ अब किसी भी व्यक्ति की बिना पड़ताल किये और बिना आकलन किये ये उपाधि प्रदान नहीं की जाएगी.

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उन्होंने आगे कहा कि, ‘यह उपाधि देने से पहले अखाड़ा परिषद यह भी देखेगी कि व्यक्ति की जीवनशैली किस तरह की है.’ आखाड़ा परिषद के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि, किसी भी संत के पास नकदी या उसके नाम पर कोई भी जमीन-जायदाद नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आगे ये भी कहा कि अगर संपति हो भी तो वो समाज के कल्याण के लिए इस्तेमाल की जाए.

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जैन ने आगे ये भी कहा कि किसी का भी अनुयायी बनने से पहले ये देख लेना चाहिए कि वो व्यक्ति विश्सनीय है या नहीं. आपको बता दें कि भारतीय अखाड़ा परिषद 14 अखाड़ों की संयुक्त संस्था है.