1965 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को पटखनी दी थी. इस युद्ध में अमेरिका के अजेय टैंक को तहस-नहस करने वाले अब्दुल हमीद के 52वें शहादत दिवस पर उनके पैतृक गाँव में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में भारत के सेनाध्यक्ष भी शामिल हुए. सेनाध्यक्ष के पहुँचने पर युवाओं ने उनका शानदार स्वागत किया.

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रविवार को जब सेनाध्यक्ष वहां पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले शहीद अब्दुल हमीद की पत्नी से मुलाक़ात की. उन्होंने सबसे पहले रसूलन बीवी के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया इसके बाद उन्होंने उनको सम्मानित किया. शहीद की पत्नी के साथ सेनाध्यक्ष ने जिस तरह का व्यवहार किया उससे साफ़ संदेश जाता है कि देश किसी भी धर्म से ऊपर है. धर्म के नाम पर जो लोग देश में नफ़रत फैलाते हैं उनके लिए भी ये एक सीख है. हिंदू-मुस्लिम होने से पहले हर शख्स एक हिन्दुस्तानी है. गाजीपुर में वीर अब्दुल हमीद के गाँव पहली बार कोई सेनाध्यक्ष पहुंचे थे जिसको लेकर गाँव वालों में उत्साह था.

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शहीद की पत्नी को सम्मानित करने के बाद जनरल बिपिन रावत ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘अब्दुल हमीद के शहादत दिवस समारोह में शामिल होने का मौका मिलने पर अपने आपको धन्य महसूस कर रहा हूं. गाजीपुर की यह भूमि धन्य है जिसने इस बहादुर नौजवान को जन्म दिया. शहीद वीर अब्दुल हमीद की जो शहादत है इसको हम विफल नहीं होने देंगे. यहां से और नौजवान फौज में भर्ती होंगे.’

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इसके बाद पत्रकारों ने सेनाध्यक्ष से डोकलाम मुद्दे को लेकर भी सवाल पूछे जिनका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि, जैसा कि आप लोगों को पता है कि डोकलाम विवाद पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और स्थिति अब सामान्य हो चुकी है. दोनों देशों के बीच जो समझौता हुआ है उसको लेकर हम यही चाहते हैं कि दोनों देश उसपर कायम रहें और शांति का माहौल बना रहे.