भारत और चीन के सैनिको के बीच महीनों तक चले गतिरोध में चीन ने अपने कदम वापस खींच लिए थे. जिसके के बाद इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीतिक जीत मानी जा रही थी. इसके बाद प्रधानमंत्री चीन में हुए ब्रिक्स सम्मलेन में बैठक के लिए पहुंचे थे जहाँ ब्रिक्स देशों के प्रमुखों के साथ मुलाक़ात के बाद नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की थी. जिसके बाद भारत और चीन के बीच शान्ति और अच्छे दोस्त के रूप में चलने को लेकर बात की गयी थी. इसके साथ ही दोनों देशों ने सभी विवादों को बात चीत के जरिये समाधान निकालने की कोशिश करेंगे इस बात पर भी चर्चा हुई थी.

 

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आपको बता दें कि डोकलाम विवाद के बाद चीन ने मंगलवार को कहा कि तिब्बत में कार्य के चलते ब्रम्हपुत्र के जलीय आकडे को अभी शेयर नही कर सकता हैं लेकिन वह कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बातचीत के लिए तैयार है. जिसे चीन ने भारत के साथ बिगड़े रिश्ते के बाद बंद कर दिया था.उन्होंने बताया कि डोकलाम विवाद के बाद चीन ब्रह्मपुत्र से छोड़े गए पानी के आंकड़े और कैलाश मानसरोवर जाने के लिए रास्ता फिर से खोलने के लिए राजी है.

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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि लंबे समय तक हमने भारतीय पक्ष के साथ नदी आंकड़े पर सहयोग किया लेकिन अभी हम ऐसी स्थिति में नही है कि नदी के प्रासंगिक आंकड़े जुटा पाएं. जब उनसे पुछा गया कि चीन यह आकडे  कब तक देगा जो डोकलाम विवाद के कारण कथित रुप से देना बंद कर दिया गया था, उन्होंने कहा, ‘‘हम इसपर बाद में विचार करेंगे.”

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भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि पहले से ही, 2006 में स्थापित विशेषज्ञ स्तरीय प्रणाली है और दो ऐसे सहमति ज्ञापन हैं, जिसके तहत  चीन 15 मई से 15 जून के बीच बाढ़ के सीजन के दौरान सतलुज और ब्रह्मपुत्र नदियों पर जलीय आंकड़े साझा करने की उम्मीद की जाती है. इस साल हमें चीन की तरफ से कोई आकडे नही मिले हैं.चीन द्वारा निचले हिस्से के देशों भारत एवं बांग्लादेश के साथ हर मानसून में आकड़े साझा करना जरुरी है ताकि वे बाढ़ की स्थिति में जरुरी कदम उठा सकें.