दिल्ली विश्वविधालय में हुए चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था लेकिन असल में इस चुनाव के पीछे का खेल कुछ और ही है. दरअसल यह चुनाव ABVP हारी नहीं है बल्कि हराई गयी है. सुनने में अजीब है लेकिन यही सच है. आज हम आपको इसके पीछे का पूरा माजरा समझाने वाले हैं.

दरअसल ABVP का उम्मेदवार था रजत चौधरी जो मात्र 2000 वोटों से हारा है, सवाल यह है कि एक ऐसा प्रताशी भी इस चुनाव में लड़ा था जिसका नाम और परचा दोनों ही रजत चौधरी से मिलते हुए थे. आपको बता दें राजा चौधरी नाम से भी एक कैंडिडेट ने इस चुनाव में भाग लिया था जिसे 3000 वोट मिली हैं.

राजा चौधरी की पार्टी का नाम भी ABVP था जिसका मतलब है अखिल भारतीय विद्या परिषद. यानी खेल साफ़ है रजत चौधरी हारा नहीं है बल्कि हराया गया है.

 

आपको बता दें यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का खुलासा हुआ है इससे पहले भी कई बार डमी कैंडिडेट की मदद से इस तरह का चुनाव लड़ा गया है. बता दें इस चुनाव में मात्र कैंडिडेट का नाम लिखा होता है जिसके चलते डमी कैंडिडेट काफी कारगर साबित होता है.

 

बहुगुणा ने बीबीसी हिंदी से कहा, ”इस हार के कई कारण हैं. स्थानीय मुद्दे, यूनिवर्सिटी से जुड़े विषय और हमारे ख़िलाफ़ खड़े किए गए डमी उम्मीदवार, सब मिलाकर इस हार के लिए ज़िम्मेदार हैं. लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसे राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ना चाहिए.”

यह बात साफ़ है कि चुनाव में धांधलेबाजी की गयी है लेकिन यह तरीक अभी कानूनी रूप से गलत नहीं है