13 सितम्बर को देहरादून की सड़कों पर कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी, अचानक सड़कों पर हजारों मुसलमान और मस्जिद के इमाम आ गये और फूंट-फूंट कर रोने लगे. इस बीच देहरादून में काफी हल्ला होने लगा और देखते ही देकते मुलमानों की संख्या बढ़ गयी.

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दरअसल रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में जगह ना मिलने के चलते देहरादून के मुसलमानों ने प्रदर्शन किया,उन्होंने केंद्र सरकार को इस मामले में बोलने की मांग की है. बता दें इस प्रदर्शन को शांत कराने के लिए जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने राष्ट्रपति को पत्र भेजा है.  शहर मुफ्ती-ए-आजम मौलाना सलीम अहमद ने कहा कि इसके लिए दुनिया के मुस्लिमों और मानवाधिकारवादियों को सक्रिय होना होगा, बेकसूर मुसलमानों को मारा जा रहा है और बच्चों पर अत्याचार हो रहा है. शिया इमाम सैयद शहंशाह हुसैन जैदी ने कहा कि यह सिर्फ मुसलमानों का ही नहीं बल्कि इंसानियत का मसला है. साथ ही सामाजिक नेता हयात खान ने कहा कि पूरी दुनिया के लोगों को यह संदेश जाना चाहिए कि भारतीय लोगों की संवेदना रोहिंग्याओं के साथ है.

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आपको बता दें सरकार ने इस मामले को लेकर एक बैठक की थी जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर अजीत डोभाल ने कुछ सबूत पेश किये थे और उउनके बारे में कई खुलासे किये हैं. इधर महबूबा मुफ़्ती ने रोहिंग्या मुसलमानों का स्वागत किया है. अभी केंद्र का फैसला आना बाकी है.