हाल ही में एक वाकया हुआ था जिसने देश को झकझोर कर रख दिया था. वाकया था एक पत्रकार की मौत का. पत्रकार गौरी लंकेश की उनकी घर के बाहर ही गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. हत्या यकीनन दुखद थी लेकिन कुछ लोगों की हरकतें इस बात से एकदम विपरीत नज़र आयीं. जानकरी के लिए बता दें पत्रकार गौरी लंकेश ने अक्सर बीजेपी और संघ पर वार किया है ऐसे में लाज़मी हैं उनकी छवि भी उस प्रकार की ही बन चुकी थी. ऐसे में गौरी लंकेश की मौत पर जहाँ सभी आक्रोशित थे, दुःख जता रहे थे, अपना कोई ख़ास खो चुके एक परिवार को सांत्वना देने में लगे थे वहीँ कुछ लोगों ने यहाँ भी अपनी गन्दी राजनीति खेली.

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गन्दी राजनीति का खेल शुरू हुआ बीजेपी और संघ पर दोषारोपण से. सवाल या यूँ कहिये आरोप लगाये गए कि गौरी लंकेश की हत्या संघ ने उनकी सोच और विचारधारा के लिए करायी है और बीजेपी इसलिए चुप्पी साधे बैठी है क्योंकि कहीं ना कहीं बीजेपी खुद भी यही चाहती थी. आरोप परवान तो खूब जोश के साथ चढ़ा हालाँकि इस आरोप में शायद कोई ख़ास दम नहीं रहा होगा कि उसी तेज़ी से ही मामला ठंडा भी पड़ गया. बात साफ़ हो गयी संघ और बीजेपी ने पत्रकार गौरी लंकेश को नहीं मरवाया था. असली दोषी कोई और था.  

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लेकिन संघ और बीजेपी पर दोष लगाने वाले भला कैसे खामोश बैठते? ऐसे में दूसरा ब्रह्मास्त्र निकाला जाता है. दरअसल  हुआ यूँ कि ट्विटर पर एक यूजर ने गौरी लंकेश की हत्या पर अभद्र टिप्पणी कर डाली. निखिल नाम के इस युवक पर लोगों ने अपने-अपने स्तर पर खोजबीन शुरू कर दी. नतीजा कामयाब रहा. यहाँ लोगों को निखिल के ट्विटर अकाउंट से ये पता चला कि पीएम मोदी निखिल को ट्विटर पर फॉलो करते हैं. बस फिर क्या था लोगों को अब मौका मिल गया. माफ़ कीजिएगा लेकिन अब लोगों का ध्यान गौरी लंकेश की हत्या से हटकर इस बात पर टिक गया कि आखिर देश का पीएम एक ऐसे शख्स को भला क्यों फॉलो करता है? निखिल को तो छोड़िये अब सारा मुद्दा ये बन चुका होता है कि पीएम मोदी ने एक ऐसे शख्स को क्यों फॉलो किया जिसने किसी की मौत पर भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया?

..लेकिन क्या वाकई ये मसला अभद्र भाषा का ही था या कुछ और? ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बात अगर अभद्र भाषा की होती तो यकीनन इस बात पर पीएम मोदी का गिरेबान पकड़ने वाले लोग आज खुद पीएम मोदी की पत्नी के बारे में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग नहीं करते और खासकर उस मुद्दे पर जहाँ जशोदाबेन का दूर-दूर तक लेना देना नहीं है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पत्रकार रवीश कुमार ने हाल ही में अपने फेसबुक स्टेटस पर पीएम मोदी की पत्नी पर कुछ ऐसा अभद्र लिखा है जो आपकी सोच से परे होगा. चलिए हम आपको दो स्क्रीनशॉट के जरिये समझाने की कोशिश करते हैं कि आखिर हुआ क्या?

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पहली तस्वीर: जहाँ एक यूजर रवीश कुमार के पोस्ट पर उनके भाई की करतूत दिखाने की बात करता है जिसके जवाब में बेवजह ही रवीश कुमार का जवाब आता है जशोदाबेन पर. 

दूसरी तस्वीर: इस दूसरी तस्वीर में रवीश कुमार अपनी भड़ास निकालते हुए लिखते हैं कि, “झूठ फैलाओ, अगर देश में पेट्रोल का दाम बढ़ गया है तो इसके लिए जशोदाबेन ज़िम्मेदार नहीं हैं ना?” 

जानकारी के लिए बता दें कि ये मौका था जहाँ रवीश कुमार अपनी एक फेसबुक पोस्ट के जरिये देश में बढ़े पेट्रोल की कीमत पर सवाल उठा रहे थे. अपनी गज भर लम्बी पोस्ट में उन्होंने क्या कुछ नहीं लिखा. बढ़ते पेट्रोल की कीमतों से जनता को होने वाली समस्या के बारे में बताया तो वहीँ दूसरी तरफ ये भी बताया कि कैसे ये समस्या अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नही है बल्कि छोटे कसबे भी इस समस्या से ग्रस्त हो चुके हैं लेकिन इसी बीच जाने क्या होता है और रवीश कुमार को जशोदाबेन की याद आ जाती है.

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अचरज होता है पढ़कर कि जो इन्सान अभी तक गौरी लंकेश पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले शख्स से इंसानियत और तमीज़ की गुंजाईश कर रहा था आखिर उसे ही ऐसा क्या हो गया कि वो इस स्तर तक गिर गया कि उस औरत को इस बात में घसीट लाया जिसका इन सब बातों से कोई सारोकार ही नहीं है. सवाल अब ये है कि क्या इस सवाल का जवाब देंगें रवीश कुमार जी? सवाल ये भी है कि आखिर इस मुद्दे में जशोदाबेन को घसीटने की क्या ही ज़रूरत थी? सवाल ये भी है कि क्या गौरी लंकेश पर अभद्र टिप्पणी के बाद इन्साफ की मशाल लेकर चलने वालों की मशाल में थोड़ी भी और लौ बाकी है कि वो जशोदाबेन के लिए इन्साफ मांगें? सवाल ये भी है कि अगर एक औरत की इज्ज़त के लिए आप लड़ाई लड़ सकते हैं तो दूसरी औरत के दामन पर छींटे डालना कहाँ का न्याय है? रवीश कुमार जी, सुन रहे हैं आप? जवाब दे पायेंगें?