हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक झन्नाटेदार फैसला सुनाते हुए कहा कि दिल्ली एनसीआर में इस दीवाली पटाखों की बिक्री बैन है. वजह बताई कि दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा बढ़ गयी है. यहाँ सबसे ज्यादा गाज जिसपर गिरी वो कोई और नहीं बल्कि पटाखा व्यापारी थे जिन्होंने दिवाली करीब देखी तो अपने गोदामों में पटाखे भर लिए ये सोचकर कि इस दीवाली इन पटाखों को बेचकर दूसरों के साथ-साथ अपनी दिवाली भी रौशन करेंगें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस एक फैसले ने इन पटाखा व्यापारियों की दिवाली पर दीवाला निकाल दिया.

..लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में पटाखों के बैन की याचिका दायर किसने की थी?  

जिसने सुप्रीमकोर्ट में ये याचिका दायर की है क्या आप जानते हैं वो कौन है? उन्होंने ये याचिका क्यों दायर की? इससे उन्हें क्या फायदा मिलने वाला है? तो चलिए हम आज आपके इन सभी सवालों के उत्तर दे देते हैं हाँ लेकिन इस दावे के साथ की इन सभी उत्तरों को जानने के बाद आपको भी यकीन नहीं होगा. जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पटाखों के बैन की याचिका दायर करने वाले कोई और नहीं बल्कि कुछ महीनों के बच्चे हैं. अर्जुन गोपाल, आरव भंडारी ओर साथ ही जोया राव, इनमें से 2 की उम्र मात्र 6 महीने थी और 1 कि उम्र 14 महीने थी. चौंक गए? जी हाँ लेकिन ये बात सौ-टका सही है.

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अब आप सोचेंगें कि ऐसा मुमकिन भी कैसे है तो हम बता दें कि असल में इन बच्चों के कन्धों पर रखकर बन्दूक चलाने वाले असल लोग जिन्होंने कोर्ट में याचिका डाली उनके नाम हैं एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण, सौरभ भसीन, ओर एडवोकेट अमित भंडारी.

जानिए क्या है अमित भंडारी का कांग्रेस कनेक्शन?

जानकारी के लिए बता दें कि अमित भंडारी, जिनका पटाखों के बैन की याचिका कोर्ट में सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है वो कांग्रेस के नेता ओर सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी के साथ काम करते हैं. इन्होने इस याचिका का कारण दिया कि दिल्ली में बढ़े प्रदूषण की वजह से इन बच्चों के फेफड़ों में दिक्कत आ रही है और वो सही से विकसित नहीं हो पा रहे हैं. बात अगर अभिषेक मनु सिंघवी की करें तो ये वो ही शख्स हैं जो कई लोगों को अपने ओहदे के चलते जज बना चुके हैं. इसके साथ ही अभिषेक मनु सिंघवी एक महिला के साथ अश्लील हरकत करते हुए भी पकड़े जा चुके हैं. यानी की कहने की बात तो नहीं है कि पटाखों की बिक्री पर दिल्ली-एनसीआर में रोक में सीधा नहीं तो घुमाकर ही सही लेकिन कांग्रेस ने जो दांव फेंका है उससे एक बार फिर उनकी हिन्दू विरोधी छवि साफ़ उजागर होती है. सिर्फ इतना ही नहीं यहाँ इस बात पर भी गौर कीजियेगा कि कांग्रेस ने अपनी गन्दी राजनीति के लिए जो पटाखा व्यापारियों के पेट पर भी लात मारी है उससे एक बात तो तय है कि इन्हें सिर्फ अपनी दाल गलाने से मतलब है दूसरों के दुःख-दर्द ख़ुशी से कुछ लेना देना नहीं है.