रोज़ाना हम देखते हैं कि इंसान कि इतनी ज्यादा भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी हो गयी है कि आजकल हर कोई सबसे आगे भागना चाहता है. आजकल तो रोड पर चलना खतरों से खाली नहीं है. हर रोज़ यही सुनने को मिलता है कि आज इतने लोगों की मृत्यु हो गयी, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसे भी मसीहे होते हैं जो ये दर्शाते हैं कि लाओ हम जान बचा लेंगे और जनता के बीच से इस घायल व्यक्ति को ले जाते हैं और खुद मौका पाते ही उसका घायल का फायेदा उठा लेते हैं. जी हाँ आज हम आपको एक ऐसे ही हादसे के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको अन्दर से झंझोर कर रख देगा.

मामला मध्य प्रदेश के इंदौर सिटी का है जहाँ एक महिला टीचर जिसका नाम शिखा सागर था उसका एक्सीडेंट हो गया था. शिखा को घायल अवस्था में देखते ही घटना स्थल पर दो लड़के आये और दोनों अपनी कार से शिखा  को हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे और शिखा को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इसी दौरान शिखा की मृत्यु हो गयी.

आपको बता दें कि शिखा की मौत की खबर जब उसके घर वालों को लगी तो उनके घर में मातम सा छा गया मानों सब कुछ लुट गया हो. शिखा के पिता गोपाल सागर जब शिखा के शव का अंतिम संस्कार करने गए तो अंतिम संस्कार के बाद उन्हें याद आया कि शिखा के पास तो मोबाइल, टेबलेट और डेबिट कार्ड रहता था जिसे लेकर वो हमेशा स्कूल जाती थी, जो कि वो सभी चीज़ें घटना के बाद से गायब हैं.

शिखा के पिता ने बिना देरी किये यह बाद पुलिस को बतायी, जिसके बाद साइबर सेल ने अपनी जांच शुरू कर दी. तीन महीने बाद शिखा का मोबाइल ट्रेस हुआ और आरोपी भी पकड़ा गया. आपको बता दें कि आरोपी जब पकड़ा गया तो उसनें बताया कि उसका नाम दीपक उर्फ आर्यन है और वो 21 साल का है, वहीँ दूसरी ओर दूसरे लड़का का नाम प्रदीप था जो कि वो भी अब इस दुनिया में नहीं है.

दीपक ने पकड़े जानें पर पुलिस को बताया कि उस दिन घटना स्थल पर वो और उसका दोस्त प्रदीप मौजूद थे. शिखा का  एक्सीडेंट हुआ तो वो ही लोग उसे अपनी कार से अस्पताल ले गए थे. अस्पताल ले जाते वक्त ही हम दोनों ने शिखा के पर्स से मोबाइल, टेबलेट और डेबिट कार्ड निकाल लिया था. डॉक्टरों ने जब यह बताया कि शिखा की तो मौत हो गई है, तो ऐसा सुनते ही हम ये सामान लेकर भाग गए और बाद में हमने उसी के मोबाइल से पेटीएम का वॉलेट क्रिएट किया और फिर उसके डेबिट कार्ड से 13 हजार 290 रुपए ट्रांसफर कर के निकाल लिए।’’ अंत में इस घटना से यही समझ आता है कि शिखा कि मौत तो होना तय थी क्योंकि उसको बचाने वाले मसीहा ही गद्दार थे, जिनके लिए लड़की की जान से ज्यादा उसका पैसा माएने रखता था. इसी लालच के चलते शिखा समय रहते अस्पताल नहीं पहुच पायी और छोड़ गयी इस दुनिया को.