आज के समय में सरकारी नौकरी पाना कोई आम बात नहीं है. इस नौकरी को पाने के लिए लोग अपने दिन रात एक कर देते हैं और ज़माने से मोह माया त्याग देते हैं ताकि वे लोग अपनी मंजिल हांसिल कर सकें. ऐसे लोग मंजिल अपने लिए तो पाना ही चाहते हैं लेकिन साथ में ये लोग इतनी मेहनत इसलिए भी करते हैं ताकि ये लोग समाज की सेवा कर सकें और समाज में बदलाव ला सकें. आज जिसके मुह से सुनो वो IAS, PCS, IPS और जज बनना चाहता है, लेकिन इनमें से कुछ ही लोग होते हैं जो बन पाते हैं और जिन लोगों के हौसले बुलन्द होते हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही बेटी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए वो काम किया है जिसपर हर किसी को नाज़ होगा.

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जी हाँ हम बात कर रहे हैं मुजफ्फरनगर की अंजुम सैफी की जिन्होंने PCS-J का एग्जाम पास कर लिया है और वे अब जज बन गयी हैं. अंजुम कि सफलता के बारे में जबसे उसके परिवार वालों को और दोस्तों को मालूम हुआ है तब से लोगों का बधाई देने के लिए आना जाना लगा हुआ है. देश का सबसे सर्वोच्च पद अंजुम ने हांसिल तो कर लिया लेकिन अभी भी उनके मन में दुःख भरा हुआ है.

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आपको बता दें कि अपनी इस कामयाबी से अंजुम खुश तो है, लेकिन वे अपने पिता को याद करते हुए रो पड़ती हैं और उनका कहना है कि, “काश आज पापा होते तो वो बेहद खुश होते’. हालाँकि अंजुम ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने परिवार को दिया है और कहा है कि उन्हें अपने परिवार का साथ मिला है, तभी वे आज इस मुकाम पर पहुंची हैं.

 

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इतनी बड़ी सफलता हांसिल करने के बाद भी अंजुम के उदास होनें की वजह यह है कि साल 1992 में अंजुम के पिता की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. उस वक्त अंजुम सिर्फ चार साल की थी और हर रोज की तरह वो अपने पिता के घर आने का इंतजार ख़ुशी के साथ कर रही थी. तभी इसी बीच उसे अपने घर के बाहर से आवाज़ आई कि अब उसके पिता इस दुनिया में नहीं रहे.

 

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अंजुम के पिता रशीद अहमद की हार्डवेयर की दुकान थी और उस वक्त राशिद अहमद ने जबरन उगाही करने वाले कुछ अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. इसी के चलते एक दिन रशीद एक हॉकर को अपराधियों से बचाने के लिए बीच बचाव करने लगे थे, तो उन अपराधियों ने गुस्से में राशिद को ही गोलियों से भून दिया था. वहीँ अंजुम के बड़े भाई दिलशाद अहमद बताते हैं वे अपनी बहन की कामयाबी पर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मै इस वक्त 40 की उम्र का हूँ और मैंने अभी तक शादी भी नहीं की ताकि मै अपना परिवार पाल सकूँ. दिल्साह्द कहते हैं कि पिता की मौत के बाद सभी भाई-बहनों ने बड़ी ही कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन बिताया है.