कहते हैं कभी-कभी बड़े से बड़ा सोर्स भी धरा का धरा रह जाता है, चाहे आप कितने भी बड़े घराने से ताल्लुक क्यों न रखते हों और चाहे कितना भी आपका बड़े से बड़े राज नेताओं के साथ उठना बैठना क्यों न हो, लकिन जा बात उस घराने की बेटी की हो जिन्होंने पूरे भारत में कई दशकों तक राज किया हो. जी हाँ हम बात कर रहे हैं इंदिरा गाँधी की पोती और सोनिया गाँधी की बेटी प्रियंका गाँधी की.

 

आपको बता दें कि प्रियंका गाँधी को देहरादून से नई दिल्ली आना था और जिसके लिए उनहोंने vip कोटे के ज़रिये ट्रेन में एसी फ‌र्स्ट क्लास की मांग की थी. उनकी इस मांग के बाद रेलमंत्री कार्यालय से मुरादाबाद रेल मंडल प्रशासन को आदेश गया था कि शनिवार रात 14 अक्टूबर को प्रियंका गांधी देहरादून से नई दिल्ली को जानें वाली ट्रेन 12206 एसी एक्सप्रेस के एसी फ‌र्स्ट क्लास में सफर करेंगी और उनका टिकेट वेटिंग में है तो इसलिए उन्हें जल्दी से जल्दी वीआइपी कोटे में चार बर्थ उपलब्ध कराई जाए.

आपको बता दें कि रेल मंत्रालय द्वारा दिए गए इस आदेश के बावजूद प्रियंका गाँधी को एसी फ‌र्स्ट क्लास में बर्थ नहीं मिल सकी जिसके चलते उन्हें एसी सेकेंड क्लास में सफ़र करना पड़ा. आपको बता दें कि आखिर क्यों प्रियंका गाँधी की मदद रेल मंत्री भी नहीं कर पाए क्योंकि असल में इसी ट्रेन में सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति ने भी एसी फ‌र्स्ट में चार बर्थ वीआइपी कोटे में मांगी थी.

 

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वहीँ अगर मंडल रेल प्रशासन की मानें तो इनके पास केवल एसी फ‌र्स्ट क्लास में चार बर्थ ही वीआइपी कोटे के अन्दर आती हैं और रेलवे के नियमानुसार अगर देखा जाये तो अन्य लोगों के बजाय देश के न्यायमूर्ति को सबसे पहले वीआइपी कोटे में बर्थ उपलब्ध कराई जाती है. रेल मंत्रालय को जब यह मामला जब बिगड़ता दिखा तो दिल्ली तक के रेल अधिकारीयों ने बिना नियम तोड़े मामले को निपटाने की कोशिश की, लेकिन जब बोर्ड के अधिकारी भी इस मामले को नहीं सुलझा पाए तो आखिर में प्रियंका गांधी को समझाकर एसी सेकंड में वीआइपी कोटे में बर्थ उपलब्ध कराकर नई दिल्ली के लिए रवाना किया गया.