18 अक्टूबर को अयोध्या में सरयू घाट पर दीपों का शहर बनाया गया, 2 लाख 40 हजार से भी ज्यादा दीपों को जलाकर भगवान श्रीराम, जानकी माता और लक्ष्मण का स्वागत किया गया. बता दें कि मान्यता है कि इस दिन भगवान राम रावण का वध करने के बाद अयोध्या नगरी वापस लौटे थे. ये दृश्य हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा भी हुआ जिसे देख भारतीयता का रंग झलकता है. भारत में कई धर्मों के लोग एकसाथ मिलकर आपसी भाईचारे से अपने-अपने त्योहारों को मनाते हैं और एक-दूसरे के पर्वों में शरीक भी होते हैं. इसी का बेहतरीन उदाहरण अयोध्या में निकली शोभा यात्रा के दौरान देखने को मिला.

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वैसे कहने को तो अयोध्या में मंदिर-मस्जिद का झगड़ा काफी पुराना है लेकिन अयोध्या में निकली शोभायात्रा ने इस झगड़े को छोटा कर दिया. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक इस शोभायात्रा में सबसे आगे 5 मुसलमान भाई चल रहे थे जिन्होंने बंदर का रूप धारण किया हुआ था. बता दें कि श्रीराम के परम भक्तों में सबसे पहले हनुमान जी का नाम आता है और इसीलिए इस शोभायात्रा में श्रीराम सेना में शामिल बंदरों का रूप धारण किये हुए ये 5 मुसलमान भाई सबसे आगे चल रहे थे.

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यह शोभायात्रा 5 किमी की थी और इस दौरान सबसे आगे चल रहे इन पांचों भाईयों पर सब फूल बरसा रहे थे और इनका पैर छूकर आशीर्वाद भी ले रहे थे. सही ही है कि आस्था में बहुत ताकत होती है और वो धर्म के बंधनों में नही बंधती. पांचों भाईयों में से एक, जिसका नाम फरीद था, उसने बताया कि “उनका परिवार कई पीढ़ियों से रामलीला का हिस्सा रहा है लेकिन उन्हें अयोध्या पहली बार बुलाया गया है.”

पांचो मुस्लिम भाई

इन सब ख़बरों के बाद भी अगर आप योगी सरकार पर धर्मवाद का आरोप लगायें तो शायद बेईमानी होगी. फ़िलहाल इंसिस्ट पोस्ट परिवार की तरफ से आप सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें.