गुजरात में इस समय चुनावी माहौल चल रहा है. चुनाव की तारीखों का एलान अभी तक नही हुआ है लेकिन नेताओं ने अपना काम खूब जोर शोर से शुरू कर दिया है. इस बार के चुनाव में एक ऐसे नौजवान युवक की खूब चर्चा है जिसे कुछ सालों पहले कोई नही जानता था. हार्दिक पटेल नाम के इस युवक पर इस समय सभी राजनीतिक पार्टियों की निगाहें टिकी हुई हैं. हार्दिक पटेल को देशभर में पहचान तब मिला जब उन्होंने पाटीदार आरक्षण के लिए आवाज उठाने के लिए आन्दोलन किया था. क्या आप जानते हैं कि आखिर हार्दिक पटेल ने आरक्षण के लिए आवाज क्यों उठाना पड़ा?

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हार्दिक पटेल का जन्म 20 जुलाई 1997 में अहमदाबाद के वरीमगांव में हुआ था उनके पिता का नाम भरतभाई और माँ का नाम उषाबेन पटेल है.  ख़बरों के अनुसार हार्दिक पटेल अपने बहन से खूब प्यार करते थे. बहन का नाम मोनिका है जिन्हें 12वीं में 84 प्रतिशत अंक मिले थे लेकिन जिले की टॉपर रहने के बावजूद भी उन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली स्कॉलरशिप नही मिल पाई.

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दरअसल मोनिका की एक दोस्त थी जिसे 81 प्रतिशत और मोनिका को 84 प्रतिशत अंक मिले थे लेकिन मोनिका की दोस्त को उससे कम अंक लाने के बावजूद सरकार के द्वारा दी जाने वाली स्कॉलरशिप मिल गयी क्योंकि वो आरक्षित वर्ग से आती थी और मोनिका इसका लाभ नही पा सकी. इसी बात को लेकर गुस्सा हुए हार्दिक पटेल ने आरक्षण को लेकर कुछ करने की ठान ली. जिसके बाद पाटीदार अनामत आंदोलन समिति यानी PAAS  का गठन हुआ और हार्दिक पटेल इसके नेता बने.

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गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी पार्टियों की निगाहें हार्दिक पटेल के उपर टिकी हुई हैं. आज हार्दिक पटेल के पास लाखों की संख्या में फॉलोवर हैं लेकिन एक ख़ास बात यह है कि हार्दिक पटेल के अधिकतर फॉलोवर भारतीय जनता पार्टी के समर्थक हैं इसलिए हार्दिक पटेल को गुजरात विधानसभा चुनाव में सोच समझकर कदम उठाना पड़ रहा है.