सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल को लेकर एक बड़ा बयान दे डाला है. ताजमहल के आसपास बिना किसी मंज़ूरी के मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण और हजारों पेड़ काटे जानें के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी के बाद तल्ख टिप्पणी करते हुए चेतावनी दे दी है कि चार हफ्ते के अन्दर जो पार्किंग बनी है उसको ढहाने का आदेश देते हुए कहा है कि ऐतिहासिक धरोहर के पास निर्माण व पेड़ों की कटाई की इजाजत देने के लिए क्यों न ताजमहल को ही कहीं शिफ्ट कर दिया जाए.

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17वीं शताब्दी की धरोहर के खिलाफ ऐसा फैसला 2 जजों की पीठ ने दिया है, जिनका नाम है मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता. वहीँ दो जजों की पीठ ने यूपी सरकार के वकील की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जताई. जिसके बात यूपी सरकार की एडिशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्य भाटी ने दोनों जजों से गुहार लगायी कि पीठ द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगाई जाए.  फिलहाल आपको बता दें कि पीठ ने इस मुद्दे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और साथ ही कहा है कि वे इस संबंध में याचिका दाखिल करें जिसके बाद ही इस अहम मुद्दे पर विचार करेंगे.

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आपको बता दें कि कोर्ट में आगरा प्रशासन के खिलाफ ऐसी शिकायत एएसआई के वकील एडीएन राव ने की थी. जिसमें राव ने पीठ से कहा है कि बिना किसी मंजूरी के पार्किंग का निर्माण हो रहा है जिसके लिए न तो पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी ली गई और न ही सीईसी से क्लीयरेंस लिया गया.

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वहीँ सुप्रीम कोर्ट पर्यावरणविद एमसी मेहता की याचिका पर गौर करते हुए ताजमहल के आस पास हो रहे विकास कार्य पर निगरानी रख रहा है. एमसी मेहता ने अपनी याचिका में कहा है, कि ताज को प्रदूषित गैसों और आसपास हो रही पेड़ों की कटाई के दुष्प्रभावों से बचाया जाये. न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दो दिन बाद ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर्यटन योजनाओं की समीक्षा के लिए ताजमहल का दौरा करने वाले हैं.