हिन्दू धर्म के कई ऐसे मंदिर हैं जिनको लेकर बहुत सारी कथाएं और उनके इतिहास को लेकर बातें प्रचलित हैं कि उनपर  यकीन करना मुश्किल हो जाता है लेकिन बात आस्था की होती है तो आपको विश्वास करना ही होता है. भगवान में विश्वास रखने वालों के लिए आज हम एक ऐसी खबर लायें हैं जो आपको उर्जा से भर देगी. इतना नही जिस खबर की हम बात कर रहे हैं उसे सिर्फ धर्म में आस्था रखने वाले लोग ही नही बल्कि वैज्ञानिकों ने भी माना है.

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भारत का उत्तराखंड राज्य पर्वतों, पहाड़ियों और तीर्थ स्थलों का बेजोड़ मेल है, अधिकतर यहाँ लोग शांति की तलाश में आते हैं. हिन्दू धर्म के नजरिये से भी ये राज्य काफी खास स्थान रखता है. देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड में काफी तीर्थ स्थल हैं. इन्हीं तीर्थ स्थलों में से एक की जानकारी आज हम आपको देने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर नासा के वैज्ञानिक भी हैरान हैं. जनसत्ता की खबर के मुताबिक उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में एक मंदिर कसारदेवी के नाम से है. इसके बारे में कहा जाता है कि इसकी स्थापना दूसरी सदी में हुई थी. इस मंदिर के बारे में ये भी कहा जाता है कि यहां माँ दुर्गा ने साक्षात दर्शन दिया था.

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इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यह जगह दुनिया की तीसरी ऐसी जगह हैं, जहां चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं. इसके अलावा दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोन हेंग भी अदभुत चुंबकीय शक्ति का केंद्र हैं. कसारदेवी मन्दिर की इस खासियत के चलते यहां नासा वैज्ञानिक शोध भी कर चुके हैं. इस मंदिर तक पहुँचने के लिए काफी सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं. मान्यता यह भी है कि इन सीढ़ियों को चढ़ने के लिए भक्तों को कुछ खास मेहनत नही करनी पड़ती. बताया जाता है कि भक्त बिना किसी थकान के मन्दिर तक पहुंच जाते हैं.

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मंदिर के बारे में मान्यता है कि करीब 25,000 साल पहले मां दुर्गा ने शुंभ और निशुंभ नामक दो राक्षसों को मारने के लिए कात्यायनी रुप में अवतार लिया था. यह मन्दिर अल्मोड़ा से करीब 10 किमी दूर कसाय पर्वत पर स्थित है. पर्यावरण के विशेषज्ञ कहते हैं कि इस क्षेत्र के आसपास वैन एलेन बेल्ट मौजूद है इसलिए यहां चुम्बकीय शक्तियां हैं. इसी जगह स्वामी विवेकानन्द ने भी तप किया था और ज्ञान की प्राप्ति की थी. तप करने के लिए ये जगह सबसे बढ़िया मानी जाती है. नासा के वैज्ञानिक चुम्बकीय रूप से इस जगह के चार्ज होने के कारणों और प्रभावों पर शोध कर रहे हैं.