सरदार बल्लभ भाई पटेल, जिनका नाम लेने भर से ही जेहन में सख्त और एक राष्ट्रवादी शख्स की तस्वीर छप जाती है. सरदार पटेल, जिन्हें आज़ादी के आंदोलनों में भाग लेने के अलावा हिंदुस्तान की 562 रियासतों को एक करने के लिए भी याद किया जाता है. आज़ादी के वक्त हिंदुस्तान में राजवंश व्यवस्था थी, देश आजाद हुआ तो दिक्कतें आईं कि क्या देश इसी तरीके से बंटकर चलेगा? क्योंकि खंडता के चलते ही देश गुलाम हुआ, सभी अपने-अपने राज्यों की फिकर में दूसरे राज्यों की मदद कम ही करते और नतीजा ये रहा कि धीरे-धीरे पूरा हिंद्स्तान गुलामी की जंजीरों में जकड़ता चला गया.

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आज़ादी मिलने के बाद ये दोबारा न हो, इसलिए सरदार पटेल ने पूरे भारत को एक धागे में पिरोने का जिम्मा उठाया. 31 अक्टूबर 2017 को सरदार पटेल की 142वीं जयंती मनायी गयी इसलिए आज हम लौह पुरुष सरदार पटेल के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप आसानी से समझ जायेंगे कि देश को लेकर उनकी सोच क्या थी.

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बारदोली सत्याग्रह के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खुश होकर बल्लभ भाई को ‘सरदार’ बना दिया था. सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री भी बन सकते थे लेकिन शायद उस दौर की कुछ राजनीतिक वजहों के चलते ऐसा हो ना सका. फ़िलहाल सरदार पटेल देश के पहले गृहमंत्री(उप-प्रधानमंत्री भी) बने और उनका लोहा पूरी दुनिया ने माना. आज के परिदृश्य में आप लौहपुरुष के जीवन और त्याग को देखेंगे तो आपको यकीन करना मुश्किल हो जायेगा कि आखिर कोई इतनी सादगी के साथ देशसेवा में लिप्त कैसे हो सकता है. आज आलीशान भरी जिन्दगी ही राजनीती की पहचान है लेकिन सरदार पटेल के जीवन में ऐसा कुछ भी नही रहा.

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सरदार पटेल के बारे में एक चीज जो सबसे ज्यादा आकर्षक और सोचने पर मजबूर करती है वो ये कि उन्होंने खून का एक कतरा बहाए बिना ही देश में फैली 562 रियासतों को अपनी कुशलता के दम पर एक धागे में पिरो दिया. इंडिया टीवी की वेबसाइट के मुताबिक “सरदार पटेल अहमदाबाद में एक किराये के मकान में रहते थे, उनका खुद का मकान भी नही था. यहीं नही जब उनकी मृत्यु हुई तो उनके बैंक खाते में महज 260 रूपये ही थे.” इन सब बातों से आप खुद समझ सकते हैं कि देश की सेवा के सिवा ‘लौहपुरुष’ का कुछ और मकसद नही था, अन्यथा आज की राजनीति में घोटालों के ऑक्सीजन को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सरदार पटेल चाहते तो क्या-क्या कर सकते थे.