8 नवम्बर को नोटबंदी को हुए एक साल पूरा हो गया लेकिन कुछ लोग अभी भी ऐसे हैं जो इस झटके से उबर नही पा रहे है. थोड़े थोड़े समय के अंतराल पर उन्हें नोटबंदी से जुड़ा झटका मिल ही जाता है. अब एक बार फिर कई नेताओं समेत हजारों लोगों को एक बार फिर झटका लगने जा रहा है. दरअसल नोटबंदी के दौरान कई लोगों ने गलत तरीके से ब्लैकमनी को व्हाइट करने की कोशिश को थी जिनमें से कुछ तो कामयाब हो गये तो वहीं कुछ असफल हो गये थे अब ED ने इस मामले पर खुलासा किया है जिसमें हजारों लोगों के नाम सामने आयें हैं.

Source

 

मीडिया रिपोर्ट  के अनुसार  ED ने मायावती समेत देश के 4000 लोगों ने नाम का खुलासा किया है जिन्होंने ने नोटबंदी का एलान होने के बाद ही अपने कालेधन को सफ़ेद करने कोशिश की थी या की थी. ED के डोजियर में बहुजन समाजवादी पार्टी की मुखिया मायावती, आरजेडी सांसद मीसा यादव, खनन उद्यमी और तमिलनाडु की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले शेखर रेड्डी दर्जन भर नेताओं के लेनदेन संदिग्ध हैं.ED डोजियर के मुताबिक़ ऐसे कम से कम 4000 मामले सामने आये हैं. ED ने नवंबर 2016 से सितंबर 2017 के बीच इन सभी मामलों में फेमा और पीएमएलए के तहत केस दर्ज किया है.

Source

ED से मिली जानकारी के मुताबिक एंजेंसी को अबतक 11000 करोड़ की हेराफेरी की बात सामने आई है.54 लोगों की गिरफ्तारी के साथ साथ 600 कंपनियों से उनके धंधे का ब्यौरा माँगा गया है. इस गोरखधंधे में संयुक्त अरब अमीरात, दुबई, मलेशिया और हांगकांग जैसे कई देशों के मनी चैनल का इस्तेमाल किया गया है. खबर के मुताबिक़ नोटबंदी का एलान होने के बाद इससे जुड़े गिरोह सक्रीय हो गये थे.

Source

मिली जानकारी के अनुसार जितने भी लोगों को आरोपी बनाया गया हैं उन्हें अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिलेगा. ईडी मौजूद सुबूतों के आधार पर अपना मजबूत पक्ष रख रही है. जिसे मोदी सरकार कालेधन के खिलाफ कड़ी कार्यवाही मानी जा रही है. इस मामले पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने कहा कि “यही वजह है कि विपक्षी दलों ने नोटबंदी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. उन्हें मालूम है कि सरकार की विभिन्न एजेंसियां काले धन के खिलाफ काम कर रही है इसलिए विपक्ष का शोर मचाना स्वभाविक है. उन्हे मालूम है कि आज नहीं तो कल सच सामने आ जाएगा”