नॉएडा सेक्‍टर-25 स्थित जलवायु विहार का सबसे बहुचर्चित केस है आरुषि और हेमराज हत्या कांड. आरुषि की हत्या के आरोप में आरुषि के माता पिता आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. आज इस केस को 9 साल बीत गए हैं, लेकिन अभी तक इस केस से जुड़ा मुख्य कारण सामने नहीं आ पाया है. लोगों के जहन में एक ही सवाल है कि आखिर बच्ची को खुद उसके माँ-बाप ही कैसे मार सकते हैं. CBI ने आरुषी की हत्या का मुख्य आरोपी उसके माता पिता को ही घोषित किया था, जिसकी वजह से ही डॉ. राजेश व नूपुर तलवार सजा काट रहे हैं.

हर बार की तरह डॉ. राजेश व नूपुर तलवार का यही कहना है कि उन लोगों ने अपनी बच्ची का क़त्ल नहीं किया है. आज इसी केस के सन्दर्भ में डॉ. राजेश व नूपुर तलवार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अपील फाइल की थी जिसपर आज 12 अक्टूबर को फैलसा आना था और फैसला आते ही दोनों बरी भी हो गए हैं. आपको बता दें कि इस केस का फैसला आने से पहले ही आरुषि की चाची वंदना तलवार ने कुछ ऐसे खुलासे किये थे जिससे इस मिस्ट्री मर्डर केस की अनसुलझी गुत्थी को काफी हद तक समझना बहुत आसान था.

आपको बता दें कि गुत्थी सुलझाने के लिए बस आपको 2016 में दिया गया आरुषि कि चाची वंदना तलवार का ‘पत्रिका’ को दिया गया इंटरव्यू ज़रूर देखना होगा. 

  • वंदना तलवार ने बताया था कि, CBI की दूसरी टीम डॉ. राजेश व नूपुर तलवार को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी, जिसमें से एजीएल कौल तो बिलकुल भी आरुषी की माँ नुपुर तलवार को पसंद नहीं करते थे. जिसकी केवल एक ही अहम वजह थी नुपूर का निडर होना था. नुपुर हमेशा ही बिना किसी से डरे और बिना किसी के दबाव में आए अपनी बात को सामने रखती थी. कई बार तो डॉ. राजेश और नुपूर की एजीएल कौल के साथ बहस भी हो चुकी थी.
  • वंदना तलवार कहती हैं कि डॉ. राजेश और नुपूर तलवार के इस तरह के बर्ताव को देखते हुए ही एजीएल कौल ने गुस्से में सीबीआई की पहली टीम की सारी कार्यवाई को गलत कहकर पलट दिया था.

  • आपको इस बारे में जानकर हैरानी होगी कि सीबीआई संस्था को भी एजीएल कौल की इमानदारी पर हमेशा से ही संदेह रहा है, जिस वजह से वो हमेशा ही सीबीआई की ओडीआई की लिस्ट में शामिल रहे हैं.
  • चाची का आरोप था कि आखिर हेमराज का फोन किसने उठाया और वह पंजाब कैसे पहुंचा, इस मामले की जांच तो कभी की ही नहीं गई.
  • चाची ने यह भी बताया कि गांधीनगर एफएसएल लैब के उपनिर्देशक एमएस दहिया ने ही साबरमति एक्सप्रेस में लगी या लगाई गई आग की भी जांच की थी और उस वक्त उन्होंने अपनी थ्योरी में बताया था कि आग बाहर से नहीं भीतर से किसी ने लगाई थी. आपको बता दें कि ऐसी थ्योरी को त्यार करके एमएस दहिया ने पूरा केस पलट दिया था. ठीक इसी तरह दहिया ने आरुषि केस की पहली थ्योरी भी पलट कर रख दिया और केस में दोबारा से सेक्स एंगल ले आए.

  • राजेश और नुपूर तलवार का ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफिक टेस्ट करने वाले डॉ. वाया का पहले तो कहना था कि इस टेस्ट से कोई भी इस बात का संकेत नहीं मिल रहा है, जिससे इस बात का पता लगता हो कि आरुषि के माता पिता ही अपनी बेटी और हेमराज के मर्डर में संबंध रखते हो और वहीं दूसरी तरफ डॉ. वाया के मुताबिक नौकरों पर किए गए टेस्ट से साफ साबित हो रहा था कि वो लोग ज़रूर इस घटना में शामिल थे, लेकिन फिर भी सीबीआई की दूसरी टीम ने नौकरों से कोई भी खास पूछताछ नहीं की.
  • चाची वंदना तलवार ने कहा कि आरुषि के शव की भी जांच करने वाले दोनों डॉक्टर डॉ. दोहरे और डॉ. नरेश राज ने पहले अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आरुषि के प्राइवेट पार्ट में कुछ भी असामान्य नहीं मिला था, लेकिन जैसे ही जांच कौल के हाथों में गई तो इन दोनों ने भी अपने बयान से पलटी मार दी.

  • सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात पता चली थी कि आरुषि की लाश का पोस्टमॉर्टम करने से पहले डॉ. दोहरे ने कभी किसी महिला या युवती के शरीर का पोस्टमार्टम किया ही नहीं था. तो उन्हें किसी भी तरह की पोस्टमार्टम का अनुभव कैसे हो सकता है.
  • दहिया की मानें तो आरुषि और हेमराज की हत्या एक कमरे में हुई थी, लेकिन फिर भी हत्यारा ने हेमराज का खून तो साफ कर दिया मगर आरुषि का नहीं.

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