भारत, अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच फिलीपिंस के मनीला में चतुर्पक्षीय बैठक हुई तो चीन की टेंशन बढ़ गयी. टेंशन भी कुछ सामान्य नही है. चीन को लगने लगा है कि अकड़ दिखाकर अब काम नही होगा. बता दें कि इस बैठक की खास बात ये रही कि ये बैठक एशिया-प्रशांत की जगह हिन्द-प्रशांत की नयी संकल्पना पर हुई. आसियान सम्मलेन से पहले हुई इस बैठक में चीन को शामिल नही किया गया था. जिस सामरिक क्षेत्र को लेकर बैठक हुई उस क्षेत्र में चीनी सेना की उपस्थिति बढ़ती जा रही है. ऐसे में चीन के  प्रति आक्रामक रुख का प्रतिरोध करते हुए सभी देश इस बात पर सहमत हुए कि मुक्त, खुला, समृद्ध और समग्र हिंद-प्रशांत, क्षेत्र के सभी देशों और खासकर दुनिया के हितों के अनुकूल है.

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NBT की खबर के मुताबिक इस बैठक को देखते हुए चीन की टेंशन बढ़ गयी है. चीन की चिंता है कि बैठक में शामिल चारो देश कहीं उसके खिलाफ कोई रणनीति न बनाये. अगर ऐसा हुआ तो चीन बेहद कमजोर हो जायेगा और वो अलग-थलग पड़ जायेगा. वैसे भी चीन पाकिस्तान को सपोर्ट करके भारत को जवाब देने की कोशिश करता आया है लेकिन ये पीएम मोदी का ही असर है कि बीते सालों में पहली बार चीन के खिलाफ लामबंदी शुरू हो गयी है. चीन इस बात को अब समझने लगा है कि भारत से अकड़ना ठीक नही होगा.

इस बैठक पर बौखलाए चीन की तरफ से चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने सोमवार को कहा कि “संबंधित देशों के बीच दोस्ताना माहौल का हम स्वागत करते हैं और साथ ही उम्मीद करते हैं कि इस तरह के संबंध तीसरे पक्ष (चीन) के खिलाफ नहीं होंगे और क्षेत्रीय शांति बनाने और स्थिरता के लिए अनुकूल होंगे.” यहाँ गौर करने वाली बात ये भी है कि एशिया-प्रशांत की जगह पर हिन्द-प्रशांत की संकल्पना दी गयी है जोकि भारत के महत्व को दर्शाता है और ही मोदी सरकार के नेतृत्व के मायने बताता है.

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