श्रीराम मंदिर निर्माण का मामला हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसके लिए मोदी सरकार और खुद सुप्रीम कोर्ट चाहती है कि इसका हल बातचीत के जरिये सरलता से निकले जिससे दोनों धर्मों के लोगों की आस्था पर चोट न हो. इन सबके बाद पहल भी हुई तो कुछ उम्मीद की किरण नजर आने लगी कि शायद दोनों पक्षों की सहमित से मंदिर निर्माण जल्द ही हो सकता है. मध्यस्थता के लिए अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने पहल करने की कोशिश की तो कुछ खास लोगों को लगने लगा कि उनकी राजनीति कचरे के डिब्बे में जाने वाली है और उसे बचाने के लिए वो फालतू के बयान देने लगे.

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बात मुस्लिमों के हितैषी बनने वाले हैदराबाद से सांसद और AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैस की है, उन्होंने श्री श्री रविशंकर के बारे में कुछ ऐसा बयान दिया है जो उनका अपमान कर रहा है. बता दें कि राम मंदिर निर्माण के लिए हो रही पहल को रोकने के लिए ओवैसी जमकर चाल चल रहे हैं. उन्होंने श्री श्री के बारे में बयान देते हुए कहा कि “वो जो भी कर रहे हैं वो महज एक मजाक है, उनके पास इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कोई अथॉरिटी नही है.”

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जनसत्ता की खबर के मुताबिक ओवैसी ने श्री श्री पर तंज कसते हुए कहा कि “वो कुछ भी कर लें लेकिन उन्हें इस काम के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार नही मिलने वाला.” ओवैसी ने कहा कि “ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसके लिए किसी भी ऑफ़र को स्वीकार नही करेगा और इस मुद्दे पर रविशंकर को अपनी पतंगबाजी बंद कर देनी चाहिए.” श्री श्री की खिल्ली उड़ाते हुए ओवैसी ने कहा कि “NGT ने उनपर जो जुर्माना लगाया है पहले वो चुकाएं फिर शांति की बात करें.” बता दें कि इसके पहले श्री श्री ने 13 नवम्बर को कहा था कि वो 16 नवंबर को अयोध्या जायेंगे और इस विवाद को सुलझाने से जुड़ी अबतक हुई बातें सकारात्मक रही हैं.

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