महात्मा गाँधी एक ऐसा नाम जिन्हें दांडी मार्च ने देश में मशहूर किया और अंग्रेजों के ख़िलाफ़ उनकी सराहनीय लड़ाई ने उन्हें भारत का चेहरा बना दिया. मानते हैं कि महात्मा गाँधी की ज़िन्दगी जितने ज्यादा उतार-चढाव से भरी थी उतनी शायद ही किसी और की ज़िन्दगी रही हो. अंग्रेजों के सैकड़ों जुल्म झेल कर भी जो अहिंसा का पाठ पढ़ाये उन बापू जैसा देश और दुनिया में ही शायद कोई रहा हो.

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महात्मा गाँधी की मौत से जुड़ा ये किस्सा यकीनन ही आप नहीं जानते होंगे… 

महात्मा गाँधी के जीवन से जुड़ी यूँ तो कई कहानियां अपने सुनी होगी लेकिन बापू की ऐसी अनगिनत कहानियों में से एक कहानी ऐसी भी है जिसके अनुसार बापू को उनकी मौत का एहसास उनकी हत्या से ठीक दो दिन पहले हो गया था. ये वाकया उस वक़्त का बताया जाता है जब महात्मा गाँधी की हत्या से यही कोई दो दिन पहले इंदिरा गाँधी बापू के घर गयीं होती हैं.

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बताया जाता है कि इस वक़्त इंदिरा गाँधी के साथ उनके चार साल के बेटे राजीव गाँधी और बुआ कृष्णा हठी सिंह भी थे. ये तीनो बापू से मिलने उनके घर बिरला हाउस पहुंचे थे. महात्मा गांधी पर एक बहुचर्चित किताब ‘गांधी : एन इलस्ट्रेटेड बायोग्राफ़ी’ लिख चुके प्रमोद कपूर बताते हैं कि गांधीजी इस तरह से अपने घर में इन मेहमानों को देखकर खुश हो जाते हैं और बोलते हैं कि, “अरे ये देखो मुझसे मिलने कौन आया है, खुद राजकुमारियों मुझसे मिलने आई हैं.” सब खुश ही थे कि तभी चार साल के मासूम राजीव गाँधी खेल-खेल में ही बापू के पैर में फूल बाँधने लगते हैं. ये वो फूल थे जो बापू से मिलने आये आगन्तुकों ने बापू को दिए थे. जब राजीव गांधी ने बापू के पैर में इस तरह से फूल बाँधने शुरू किये तो उनकी मासूमियत देखकर पहले तो बापू ज़ोर से हंस पड़े और फिर उन्होंने मजाक में ही राजीव के कान खींचे और कहा ऐसा मत करो बेटे. ऐसा सिर्फ़ मरे हुए लोगों के साथ किया जाता है. सिर्फ मरे हुए लोगों के पैर में फूल बाँधे जाते हैं.”

 

कहा जाता है कि शायद इस वक़्त गांधी को अपनी मौत का आभास हो चला था. इस वाकये के दो दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई. बीबीसी में छपे एक लेख से लिया गया अंश.

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