इस देश की राजनीति का स्तर कितना गिर गया है यह शायद बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि जहां एक पार्टी (बीजेपी) देश को बचाने के लिए दिन-रात काम कर रही है वहीं बाकी सभी मिलकर उसे गिराने में लगे हैं. फैसला देशहित में हो या जनता के हित में विपक्ष को मतलब सिर्फ विरोध करके राजनितिक रोटियाँ सकने से है. सबसे बड़ा उदाहरण खुद राहुल गाँधी ही हैं विपक्ष के वो नेता जो जहाँ जाते हैं अपना मजाक बनवाते हैं और बेहद नीच राजनीति करते हुए वोट खींचते हैं.

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हाल ही में मीडिया में एक खबर आई है कि चित्रकूट में बीजेपी हार गयी है और कांग्रेस ने “बड़ी जीत” हासिल की है. इस जीत के पीछे की कहानी अगर आपको बता दी तो श्याद आप कांग्रेस से नफरत करने के लिए मजबूर हो जायेंगे. अभी तक कांग्रेस ने शहीद सैनिकों की मौत पर ही राजनीति की थी लेकिन अब अपनी ही पार्टी के मरे हुए लोगों को राजनितिक रोटियां सकने के लिए इस्तेमाल किया है.

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दरअसल तीजे में कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी को कुल 66,810 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी को कुल 52,677 मत प्राप्त हुए हैं. आपको बता दें इस  सीट पर पहले से कांग्रेस का राज़ था लेकिन चित्रकूट सीट विधानसभा सीट विधायक प्रेम सिंह के निधन से खाली हुई थी और कांग्रेस ने उन्हीं के नाम पर वोट  मांगी थी.

 

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कांग्रेस की पारंपरिक सीटों में से एक चित्रकूट सीट है जिसपर बीजेपी के हार का मुख्य कारण कांग्रेस की यह अपील थी कि स्वर्गीय प्रेम सिंह ने नीलांशु चत्रुवेदी को उत्तराधिकारी घोषित किया है. साथ ही कांग्रेस ने प्रेम सिंह के निधन को लेकर कई भावनात्मक अपील की हैं जिसकी वजह से कांग्रेस का पलड़ा भारी था. मीडिया इसे बीजेपी की बड़ी हार करके दिखा रही है जबकि इस सीट पर बहुत पहले से कांग्रेस का ही राज़ है. आपको बता दें इस सीट पर 65 प्रतिशत मतदान हुआ था जिसमें महिलाएं ज्यादा हैं.

अब यह बात साफ़ है कि जिस ‘चित्रकूट’ चुनाव को मीडिया ‘शिवराज सिंह’ के विफलता से जोड़ रही है, वहाँ BJP हारी नहीं बल्कि कांग्रेस ने अपनी  नीच राजनीती से हराया है. यह कहना भी गलत नहीं होगा कि बीजेपी हारी नहीं है बल्कि कांग्रेस अपनी पुरानी  सीट पर ही जीती है. 

 

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