ये बात तो सभी जानते हैं कि देश में एक बार फिर चुनावी रण तैयार हो रहा है. इसकी वजह साफ़ है. अगले महीने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं और लाज़मी है कि ऐसे में देश की दोनों बड़ी पार्टियाँ चुनाव प्रचार-प्रसार में लग गयी हैं, ऐसे में राहुल गाँधी भी ज़ोरोशोरों से गुजरात में विधानसभा चुनाव के प्रचार में लगे हैं. बताया जा रहा है कि वो जहाँ भी जाते हैं लोग उनसे मिलने के लिए आतुर नज़र आते हैं लेकिन क्या आपने गौर किया राहुल के इसी दौरे में सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात क्या थी? नहीं ? तो हम आपको बताते हैं. इस चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात रही राहुल की पीठ पर लटका ये बैग.

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अब सवाल ये है कि आखिर इस बैग में ऐसा क्या है जो राहुल इसे हर वक़्त अपने साथ रखते हैं?

गौर किया जाये तो आम तौर पर एसपीजी सुरक्षा के बीच चलते नेताओं को खुद अपना सामान उठाते नहीं देखा जाता है लेकिन ना जाने राहुल गाँधी के इस ख़ास बैगपैक में ऐसा क्या है कि वो उसे खुद से दूर करने को राज़ी ही नहीं हो रहे हैं. जानकारी के लिए बता दें कि जब गुजरात में कांग्रेस की नवसर्जन यात्रा के तीसरे चरण के लिए जब राहुल एयरपोर्ट पहुंचे तो उन्होंने कंधे पर यह बैग टांग रखा था. इतना ही नहीं इसके बाद वो जहाँ भी गए उनके साथ ये बैग लोगों ने देखा.

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ऐसे में इस बैग को लेकर सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ लोग राहुल गाँधी की सादगी का लोहा मान रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोग इसे ड्रामा भी बता रहे हैं. इसी बीच कुछ यूजर्स ये भी जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर इस बैग में क्या हैं? तो हम आपको बता दें कि सूत्रों से मिली जानकारी की मुताबिक राहुल अपने बैग में कुछ कपड़े और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें रखते हैं. इसमें मोबाइल चार्जर जैसा जरूरी सामान भी शामिल है.

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चुनाव जीतने की जद्दोजहद में इस्तेमाल की जा रही है ये बैग?

यहाँ ये भी बात गौर करने वाली बात ये भी है कि अपना जन्मदिन विदेश में मनाने वाले राहुल गाँधी और z प्लस सिक्यूरिटी वाले राहुल गाँधी को आखिर क्या ज़रूरत पड़ गयी कि वो खुद ही अपना बैग ले कर चलें? तो यहाँ हम आपको बता दें कि बीते कई दिनों से ऐसे कई सर्वे आये हैं जिसने हिमाचल में कांग्रेस की हार करीब-करीब पुख्ता कर दी है ऐसे में बचता है गुजरात, लेकिन यहाँ भी समस्या यही है कि जनता को कैसे लुभायें? तो ऐसे में शायद यहाँ सबसे आसान तरीका राहुल गाँधी को यही नज़र आ रहा है कि आम, साधारण बनकर वो जनता को लुभा सकते हैं तो चलिए अपना बैग ही उठाकर शुरुआत करते हैं. वो जनता को इस बात का एहसास दिलाना चाहते हैं कि वो कितने ‘साधारण’ कितने ‘आम-नेता’ हैं.
खबर source: आजतक 

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