“बेटा घर से जा रही हो, आते-आते शाम हो जाएगी, अपना ध्यान रखना.”, “बेटा, जितना हो सके अजनबियों से दूरी रखना”, “बेटा, उस ऑटो में अगर पहले से ही पुरुष सवारी है और देर भी हो गयी है तो कोई बात नहीं, कोई दूसरा ऑटो देख लेना, लेकिन सुरक्षित घर आना”, “अपना ध्यान रखना”. वगैरह-वगैरह. आपकी माँ ने भी आज तक ना जाने कितनी ही बार इस तरह की बातें आपसे की होंगी, की है ना? इसमें कोई गलती है? नहीं? वो आपकी माँ है. चिंता का हक़ और परवाह करने की समझ उनमे आपसे ज्यादा है. मानते हैं ना?

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अगर यहाँ तक सब सही है तो किरन खेर का बयान गलत कैसे हुआ? क्या वो गलत इसलिए है क्योंकि वो एक राजनैतिक पार्टी से ताल्लुक रखती हैं? क्या वो इसलिए गलत है क्योंकि उनका ये बयान उस वक़्त आया है जब हम जैसी ही एक लड़की, एक बार फिर अपनी आबरू बचाने में नाकाम रही? मुझे समझ नहीं आ रहा है कि आखिर लोग किरन खेर के इस बयान को इतना गलत दिखा और बता क्यों रहे हैं?

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अब अगर आपको ये समझ नहीं आया कि ये विवाद है क्या तो हम आपको बता दें कि दरअसल हाल ही में किरन खेर एक इवेंट में पहुंची थीं जहाँ उन्होंने एक बयान दिया कि, ऑटो में अगर पहले से 3-4 आदमी बैठे हैं तो बिटिया को उसमें नहीं बैठना चाहिए. लोगों को किरन खेर का ये बयान गले नहीं उतरा, और क्यों? ये नहीं पता. किरन खेर के शब्दों में बताएं तो उन्होंने कहा था कि, “मैं सारी बच्चियों को सलाह देना चाहती हूं कि बेटा जब ऑटो में तीन आदमी बैठे हैं तो आपको उसमें नहीं चढ़ना चाहिए. मैं बच्चियों की सुरक्षा के लिए ऐसा कह रही हूं. लड़कियों को थोड़ा सतर्क रहना पड़ेगा. जब मैं भी छोटी थीं तो सतर्क रहती थीं.”

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मैने खुद ये वीडियो कई बार सुना. मुझे लगा जैसे मेरी माँ मुझे नसीहत देती हैं वैसे ही किरन खेर ने कहा है, लेकिन ये बवाल अभी भी मेरे सिर के ऊपर से चला गया है. आपको समझ आया हो तो कृपया ज़रूर समझा दीजिये मुझे. हां यहाँ एक बात गौर करने वाली है कि कुछ लोग किरन खेर के इस बयान पर ये कहकर भी हमला बोल रहे हैं कि “सुरक्षा देने की बजाय उन्होंने रेप पीड़िता को दोषी ठहराया है, लेकिन यकीन मानिये किरन खेर का वीडियो देखकर मुझे कहीं भी ऐसा नहीं लगा. शायद हम सबको यहाँ ये समझने की ज़रूरत है कि गलती पीड़ित इंसान की नहीं है, गलती हमारे आजके इस माहौल में है.

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ऐसे में अगर एक माँ, एक औरत, एक दोस्त, एक इन्सान दूसरे इंसान की परवाह में ये कह देता है कि वहां मत जाओ, वहां खतरा हो सकता है तो गलती उस इंसान की नहीं बल्कि मौजूदा हालात की है. समझिये. ये समझने की ज़रूरत है. मेरी नज़र में यहाँ किरन खेर गलत नहीं हैं और अगर किरन खेर गलत हैं तो शायद मेरी माँ भी गलत हुईं जिन्होंने आजतक मुझे सतर्क और सुरक्षित रहने के लिए ना जाने कितनी ही ऐसी सलाह दी है.

जानिए क्या है मामला?

जानकारी के लिए बता दें कि 20 नवंबर को चंडीगढ़ के मोहाली में एक २२ साल की लड़की के साथ गैंगरेप की वारदात हुई थी. मामले में मिली जानकारी के अनुसार उस वक़्त पीड़ित लड़की ने घर जाने के लिए ऑटो लिया था जिसमें पहले से कुछ युवक सवार थे. बताया जा रहा है कि सफर शुरू हुआ तो ड्राइवर ने सेक्टर-42 के पेट्रोल पंप पर फ्यूल भरवाया और सेक्टर- 53 पर बदनीयत के चलते ऑटो खराब होने का बहाना बनाकर ऑटो रोक दिया. इसके बाद उन युवकों ने लड़की को सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ गैंगरेप की शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया.

(ये आर्टिकल लेखक की स्वतंत्र राय है.)