भगवान श्रीराम हिंदुस्तान के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक हैं, लेकिन उनके जन्मस्थान और उसपर मंदिर बनने को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है. मामला कोर्ट में है, हालांकि मोदी सरकार में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस विवाद का हल निकल जायेगा. वैसे एक समय ऐसा भी था जब सत्ता में रही कांग्रेस सरकार ने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया था और राम-सेतु तुड़वाने पर विचार कर रही थी. 2007 में कांग्रेस की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था जिसमें राम-सेतु को महज कोरी-कल्पना बताया था. फ़िलहाल अब जो ख़बरें आ रही हैं उससे उस हलफनामे को तगड़ा झटका लगा है.

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आपको राम-सेतु से जुड़ी नई खबर बताएं, इससे पहले आपको बता दें कि जब केंद्र में मोदी सरकार आई तो केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था कि “हिन्दुओं की आस्था का विषय है राम-सेतु, इसको किसी भी कीमत पर तोड़ा नही जायेगा.” फ़िलहाल आपको राम-सेतु से जुड़ी वो खबर बताते हैं जिनसे कांग्रेस की फजीहत हो रही है. एक साइंस चैनल ने सोमवार को ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया जो महज कुछ ही देर में वायरल हो गया. इस वीडियो में दावा किया गया है कि “रामसेतु पूरी तरह कोरी कल्पना नहीं हो सकता है, क्योंकि इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि भारत और श्री लंका के बीच बलुई रेखा पर मौजूद पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं.”

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इस चैनल के दावे ने कांग्रेस के उस दावे की धज्जियां उड़ा दीं हैं, जिसमें उसने कहा था कि राम-सेतु जैसा कुछ नही है, और उसे व्यापार करने के लिए बाधक बताया था, जिसकी वजह से उसे तोड़ने पर विचार कर रही थी. बता दें कि इस वीडियो में कुछ वैज्ञानिक और भूविज्ञानियों ने दावा किया है कि जो पत्थर राम-सेतु पर पाए गये हैं वो एकदम अलग है और प्राचीन भी हैं. भूविज्ञानी ऐलन लेस्टर का कहना है कि इस सेतु में उपयोग किये गये पत्थर कहीं और से लाये गये हैं, वो सामान्य पत्थर नही हैं.” बता दें कि इन सबके बाद भी रहस्य बना हुआ है कि ये पत्थर कहां से और कैसे आये हैं. इस सेतु के निर्माण के बारे में कहा जा रहा है कि ऐसा कर पाना सामान्य मनुष्य के लिहाज से बहुत बड़ी बात है.

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